सिंगरौली में खुलेआम तांडव कर रहा शराब ठेकेदार

सिंगरौली में खुलेआम तांडव कर रहा शराब ठेकेदार

गांव-गांव में बिकवा रहा शराब ,आबकारी अमला मौन

कार्यवाही के नाम पर कोरमपूर्ति करती है पुलिस,नेता-जनप्रतिनिधि भी मौन...?

मुद्दे की बात- नीरज द्विवेदी के साथ

अनोखी आवाज सिंगरौली,बैढ़न। जिले में हर गली मोहल्ले में शराब की अवैध पैकारी हो रही है। लेकिन आबकारी अमला धृतराष्ट्र की तरह आंखों पर पट्टी बांधे बैठा है। आश्चर्य  तो तब होता है जब पुलिस भी ऐसे अवैध शराब विक्रेताओं पर कोई कार्यवाही नहीं करती। लिहाजा शराब ठेकेदार पूरे जिले में खुलेआम बेखौफ होकर तांडव कर रहा है।


हाल वही है "जब सईया भए कोतवाल फिर डर काहे लागे"।

समझ नहीं आता शराब की अवैध पैकारी करवाने वाले ठेकेदार पर कार्यवाही कब होगी..? औ कौन करेगा..?

अब तो किराने की दुकान में भी बिकने लगी शराब

एक दौर था जब शराब शौकीनों को अपना शौक पूरा करने के लिए शराब दुकान तक जाना पड़ता था। लेकिन वह दौर कब का खत्म हो गया। हाल कुछ यूं है कि अब तो किराना दुकानों में भी बड़ी ही सहजता से शराब मिल जा रही है। सूत्रों की माने तो इसकी जानकारी खाकी को भी है। लेकिन कार्यवाही की जगह उन्हें संरक्षण देने जैसा कार्य किया जाता है। आसानी से आसपास मिल जाने वाले शराब से परिवार में विवाद हो रहा है,अनेको परिवार हर रोज टूट रहे है लेकिन समाज में निवासरत ऐसे दुश्मनों को केवल पैसे की पड़ी है। कोई मरे अथवा जिंदा रहे उन्हें क्या उन्हें तो सिर्फ बेचने से मतलब है।

आबकारी अमला मौन,पुलिस करती है कोरमपूर्ति

मां अष्टभुजा को जब से जिले में शराब दुकान संचालित करने की जिम्मेदारी मिली है। तब से समूचे जिले में अवैध शराब की पैकारी ने और जोर पकड़ लिया है लेकिन आबकारी अमला है कि यह मानने को तैयार नहीं है। लिहाजा यह ठेकेदार बेखौफ होकर अपने कार्य को अंजाम दे रहा है। पुलिस है कि कोरमपूर्ति में लगी रहती है और छोटे-मोटे लोगों पर कार्यवाही कर खुद को न जाने क्या साबित करना चाहती है। लेकिन वास्तविकता तो यह हैं कि पुलिस ऐसे अवैध शराब विक्रेताओं पर नकेल कसने में कोई रुचि नहीं लेती।

नेता जनप्रतिनिधि भी मौन, क्या इन्हें भी मिलता है कमीशन..?

यूं तो जिले में हर गली मोहल्ले में सफेद कुर्ता लगाए नेता मिल जाएंगे लेकिन इन्हें सिंगरौली की समस्याओं अथवा व्यवस्था परिवर्तन से कोई विशेष वास्ता नहीं है।अब बेचारे करें भी तो क्या इस बेरोजगारी के दौर में कुछ तो करना पड़ेगा।खैर जनप्रतिनिधियों को तो इस विषय पर गंभीरता दिखानी चाहिए। ऐसे ठेकेदार के ऊपर नकेल कसने का इंतजाम करना चाहिए। लेकिन हो रहा है इसके विपरीत।  पुलिस भी मौन, आबकारी अमला भी मौन, जनप्रतिनिधि भी मौन, अब इन सब की मौन को क्या समझा जाए..? कहीं ऐसा तो नहीं कमीशन के चक्कर में सब मुंह पर पट्टी बांधे है।

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