सिंगरौली- वीरेंद्र गोयल को अध्यक्षी की कमान मिलने पर संगठन में पड़ी फूट

सिंगरौली- वीरेंद्र गोयल को अध्यक्षी की कमान मिलने पर संगठन में पड़ी फूट

 1 सैकड़ा से ज्यादा लोगों ने बनाई दूरी, नगरीय निकाय चुनाव बड़ी चुनौती

 नोखी आवाज़ सिंगरौली। भारतीय जनता पार्टी शीर्ष नेतृत्व ने बड़ी ही आशा और उम्मीद के साथ वीरेंद्र गोयल को अध्यक्ष की कुर्सी सौंपी थी।आप सब भली भांति यह भी जानते हैं कि वर्तमान प्रदेश उपाध्यक्ष कांतदेव सिंह का अहम टाइम पर इस्तीफा स्वीकार कर वीरेंद्रर गोयल के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी थी। लेकिन किसे पता था कि महज कुछ गिनती के दिनों में ही संगठन की ऐसी हालत हो जाएगी।

श्री गोयल को अध्यक्षी की कमान मिलने की भनक मिलते ही विरोध के स्वर उठने लगे थे। बड़े और गंभीर आरोप लगे थे। लेकिन सूत्र बताते है कि तत्कालीन  प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह व सांसद रीति पाठक की सहमती पर इन्हें जिम्मेदारी मिली थी। लेकिन संगठन में धीरे-धीरे जो फुट पड़ी और खाई निर्मित हुई वह आजतक नही भर सकी। और जो वर्तमान मेंं हालात है उसेे देख कर तो नहीं लगता की जो खा खाई हैैै इतनी जल्दी भरने वाली है।

संगठन में पड़ी फूट,कैसे भरेगी गहरी खाई

जिलाध्यक्ष का  दायित्व होता है कि वह संगठन को मजबूती दे भितरघात होने से रोके और सबको साथ लेकर चले ताकि देश के प्रधान मंत्री की मंशा "सबका साथ सब का विकास" फलीभूत हो सके । लेकिन यहां तो अध्यक्ष ने एकला चलो की नीति अपना ली जिससे महज कुछ ही दिनों में संगठन में वर्षो से कार्य करने वाले कार्यकर्ता धीरे-धीरे कर दूरिया बनाने लगे और आज ऐसा समय है कि दर्जनभर से ज्यादा ऐसे कार्यकर्ता व पदाधिकारी जो 30-40 वर्षो से भी ज्यादा पार्टी को अपना योगदान दिए आज अपने को अलग करना ही बेहतर समझ रहे है।

 उपेक्षा के कारण बनाई दूरी, नगरीय निकाय चुनाव की चुनौती ..?

भारतीय जनता पार्टी तन-मन-धन  से लगे ऐसे सैकड़ो कार्यकर्ता व पदाधिकारी आज अध्यक्ष वीरेन्द्र गोयल के व्यवहार के कारण दुःखी होकर इनके कार्यकाल से दूरी बना लिए है।इतना ही नही बल्कि संगठन के कार्यक्रमों में भी नजर नही आते ऐसे में आगे नगरीय निकाय चुनाव  होने की संभावना है। और जैसी स्थिति वर्तमान में सिंगरौली भाजपा में है उसे देखकर कोई भी सहज अंदाजा लगा सकता है कि आगामी चुनाव बड़ी चुनौती लेकर सामने आएगा। सूत्र बताते है कि अभी  प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा का सिंगरौली दौरा है ऐसे में अध्यक्ष वीरेन्द्र गोयल के कार्यप्रणाली व व्यवहार से तंग कार्यकर्ता व पदाधिकारी अपनी पीड़ा व्यक्तकर सकते है ।यदि ऐसा  हुआ तो वीरेन्द्र गोयल के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है..?