कलिंगा कंपनी का झिंगुरदह में नही है डीजल स्टोरेज का लाईसेंस

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ओबी कंपनी कलिंगा में चल रही मनमानी, एनसीएल प्रबंधन का मिला है संरक्षण, प्रदेश सरकार को लगा रहे करोड़ों चूना

सिंगरौली एनसीएल परियोजना में कार्यरत ओबी कंपनी कलिंगा कार्पोरेशन एमपी सरकार को राजस्व क्षति पहुंचाने में कोई कोर कसर नही छोड़ रही है। महीने में अकेले कलिंगा कंपनी प्रदेश सरकार को कई करोड़ की चपत पहुंचा रही है। आलम यह है कि ओबी कंपनी कलिंगा का झिंगुरदह परियोजना में डीजल स्टोरेज का लाईसेंस नही है। फिर यह डीजल अमलोरी से झिंगुरदह में कैसे पहुंच रहा है।


दरअसल एनसीएल परियोजना के ओबी कंपनियां डीजल में व्यापक पैमाने पर खेला कर रही है। यूपी से डीजल सस्ता खरीदकर मध्यप्रदेश सरकार को राजस्व क्षति जमकर पहुंचा रही है। आलम यह है कि पिछले वर्ष अक्टूबर महीने में ओबी कंपनी कलिंगा कार्पोरेशन अमलोरी परियोजना में आई है। तब से डीजल का बड़ा खेल कर रही है। आरोप है कि अप्रैल महीना में कलिंगा कंपनी अमलोरी परियोजना में डीजल स्टोरेज के लिए लाईसेंस हासिल कर ली। लेकिन इसके पहले इस परियोजना के ओबी कंपनी में डीजल कैसे पहुंच रहा था। यह अपने आप में बड़ा प्रश्रचिन्ह खड़ा हो रहा है। सूत्रों की बात यदि माने तो कलिंगा कंपनी यूपी के मुगल सराय से डीजल परिवहन कर रहा है। जबकि एनसीएल एवं ओबी कंपनी कलिंगा के बीच हुये एनआईटी के एग्रीमेंट के अनुसार स्थानीय फिलिंग स्टेशनों से क्रय करने का है। किन्तु मोटी रकम प्रति लीटर करीब 7 रूपये बचाने के चक्कर में स्थानीय एमपी के सिंगरौली से डीजल खरीदी करना उचित नही समझा। यदि डीजल सिंगरौली जिले से डीजल का क्रय करते तो प्रदेश सरकार को जीएसटी के रूप में महीने में लाखों-करोड़ों रूपये का मुनाफा होता। किन्तु कंपनी अपने खुद के मुनाफा कमाने के चक्कर में प्रदेश सरकार को करोड़ों रूपये का घाटा पहुंचाने कही से कोई कोर कसर नही छोड़ रही है। वही हैरानी की बात है कि झिंगुरदह परियोजना में कलिंगा कंपनी को डीजल स्टोरेज का लाईसेंस नही मिला है। सूत्र बताते है कि मुगल सराय से आने वाला डीजल अमलोरी परियोजना से पहुंच झिंगुरदह में खपा दिया जा रहा है। यह अनुमति किसने दिया है। इस पर भी तरह-तरह की चर्चाएं छिड़ गई हैं।


उच्च स्तरीय जांच से होंगे कई खुलासे


आरोप लगाया जा रहा है कि प्रदेश सरकार को राजस्व घाटा पहुंचाने में एनसीएल के साथ-साथ जिला प्रशासन भी कम नही है। यह मामला काफी दिनों से चल रहा है। इसके बावजूद जिला प्रशासन इस पर कोई ठोस कार्रवाई नही कर रहा है। लिहाजा ओबी कंपनियों के कर्ताधर्ता इसका भरपूर फायदा उठा रहे हैं। प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि यदि झिंगुरदह परियोजना में कलिंगा कंपनी का डीजल स्टोरेज नही है फिर यहां रोजाना लाखों लीटर डीजल कैसे पहुंच जा रहा है। यदि अमलोरी परियोजना से डीजल झिंगुरदह में खपाया जा रहा है तो इसकी उच्च स्तरीय जांच हो और आरोप सही मिलने पर अमलोरी परियोजना का लाईसेंस भी निरस्त होना चाहिए। प्रबुद्ध नागरिकों ने इस ओर कलेक्टर का ध्यान आकृष्ट कराते हुये उक्त मामले की उच्च स्तरीय जांच कराकर कार्रवाई किये जाने की मांग की है।


एनसीएल प्रबंधन रिटेरल के दर से कर रहा भुगतान


सूत्रों के मुताबिक पिछले वर्ष एनसीएल एवं कलिंगा कार्पोरेशन कंपनी के बीच एनआईटी के बाद एग्रीमेंट हुआ था। उस एग्रीमेंट में तय था कि कलिंगा कंपनी स्थानीय स्तर पर खुरदुरा व्यापारी डीजल-पेट्रोल पंप से डीजल क्रय करेगा और डीजल की कीमत उस वक्त करीब 94 रूपये था। बाद में डीजल का दर 2 रूपये घट गया है। आरोप है कि एनसीएल प्रबंधक खुरदुरा दर पहले के हिसाब से 94 रूपये एवं मौजूदा समय में करीब 92 रूपये प्रति लीटर के हिसाब से भुगतान कर रहा है। जबकि कलिंगा कंपनी यूपी के कंज्यूमर से 85 रूपये प्रति लीटर क्रय कर रहा। आरोप लगाया जा रहा है कि एनसीएल प्रबंधन उक्त कंपनी को लाखों-करोड़ों रूपये का फायदा पहुंचा रहा है। सवाल उठाया जा रहा है कि आखिरकार भुगतान के समय एनसीएल का प्रबंधन जांच क्यो नही करता है और इस बात का भी पता नही लगाता है कि डीजल कहां से आ रहा है।

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