BJP सांसद वरुण गांधी के बागी सुर, कहा- लखीमपुर हिंसा को हिंदुओं और सिखों के बीच युद्ध के तौर पर पेश किया जा रहा

BJP सांसद वरुण गांधी के बागी सुर, कहा- लखीमपुर हिंसा को हिंदुओं और सिखों के बीच युद्ध के तौर पर पेश किया जा रहा

 

 

 

 

UP: भारतीय जनता पार्टी के सांसद वरुण गांधी ने एक बार फिर से बागी तेवर अपनाते हुए पार्टी से इतर अपनी राय रखी है। लखीमपुर में हुई हिंसा को लेकर वरुण गांधी ने कहा है कि इस मामले को हिंदुओं और सिखों के बीच युद्ध के तौर पर पेश किया जा रहा है, जो खतरनाक है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हो रहा है तो यह गलत नैरेटिव है। वरुण गांधी ने नसीहत देते हुए कहा कि नेताओं को अपने छोटे स्वार्थों को सिद्ध करने के लिए राष्ट्रीय एकता को दांव पर नहीं लगाना चाहिए। हालांकि वरुण गांधी ने ऐसे किसी नेता या शख्स का नाम नहीं लिया, जो ऐसा कर रहा हो। 

 

 

 

 

 

 

वरुण गांधी ने ट्वीट किया, 'लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के मामले को हिंदू बनाम सिख युद्ध के तौर पर प्रोजेक्ट करने के प्रयास चल रहे हैं। यह अनैतिक रूप से गलत है और भ्रमित करने वाला नैरेटिव है। इस तरह की चीजों से खेलना खतरनाक है। इससे एक बार फिर से जख्म उभर सकते हैं, जिन्हें भरने में लंबा वक्त लगा है। हमें क्षुद्र राजनीतिक हितों के लिए राष्ट्रीय एकता को दांव पर नहीं लगाना चाहिए।' इससे पहले भी कई बार वरुण गांधी भाजपा के विपरीत अपनी राय जताते रहे हैं। लखीमपुर खीरी कांड को दोषियों को सजा दिए जाने की मांग करते हुए उन्होंने सीएम योगी को पत्र लिखा था। 

 

 

 

 

 

यही नहीं वरुण गांधी ने इससे पहले भी किसानों की मांगों का समर्थन करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ को खत लिखा था। बता दें कि भाजपा ने इसी सप्ताह गुरुवार को अपनी 80 सदस्यों वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी का ऐलान किया है। इस टीम में वरुण गांधी और उनकी मां मेनका गांधी को जगह नहीं दी गई है। माना जा रहा है कि वरुण गांधी के बागी तेवरों के चलते ही उनका इस समिति से पत्ता काटा गया है। वरुण गांधी कई सालों से भाजपा में नेपथ्य में दिख रहे हैं। इसके अलावा बीच-बीच में पार्टी से इतर आने वाले उनके बयानों ने भी दोनों के बीच दूरी बढ़ाने का काम किया है।

 

 

 

 

 

बता दें कि भाजपा ने अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में एलके आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी समेत कई केंद्रीय मंत्रियों को जगह दी गई है। लेकिन वरुण गांधी और उनकी मां मेनका गांधी को इससे बाहर रखा गया है। माना जा रहा है कि वरुण गांधी के बागी तेवरों के चलते पार्टी ने यह फैसला लिया है।