मध्य प्रदेश में दो साल से टल रहे त्रि स्तरीय पंचायत चुनाव के लिए अब कोरोना प्रतिबंधों से खुले द्वार

मध्य प्रदेश में दो साल से टल रहे त्रि स्तरीय पंचायत चुनाव के लिए अब कोरोना प्रतिबंधों से खुले द्वार

 

 

मध्य प्रदेश में दो साल से त्रि-स्तरीय पंचयत चुनाव टाले जा रहे थे जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास का कार्य लगभग रुक सा गया था। इसमें सबसे बड़ी बाधा कोरोना प्रतिबंध माने जा रहे थे और राज्य सरकार ने लोकसभा-विधानसभा उपचुनाव के परिणामों के बाद इस तरफ काम तेज कर दिया था। अब कोरोना महामारी संक्रमण  से बचाव के लिए लगाए गए प्रतिबंधों को हटाए जाने से पंचायत चुनाव की घोषणा जल्द से जल्द होने की संभावना बढ़ गई है। 

 

 

 

मध्य प्रदेश में 23835 ग्राम पंचायतें हैं तथा 904 जिला पंचायत सदस्य और 6035 जनपद सदस्य त्रि-स्तरीय पंचायत का प्रतिनिधित्व करते हैं। 2014-15 में पंचायत चुनाव हुए थे और इससे 2020 तक उनका कार्यकाल समाप्त हो चुका है। प्रदेश में 53 अनुसूचित जनजाति और जाति के नगरीय निकाय भी हैं जिनमें से ज्यादातर का कार्यकाल समाप्त हो गया चुका है। इस वजह से गावों और अनुसूचित जाति व जनजाति के क्षेत्रों के विकास कार्यों पर विपरीत असर पड़ रहा है। 

 

 

 

बताया जाता है कि त्रि-स्तरीय पंचायत चुनावों के पहले परिसीमन और आरक्षण का काम भी होना है। परिसीमन को लेकर अभी कोई सुगबुगाहट दिखाई नहीं दे रही है तो आरक्षण पर भी अभी किसी तरह की चर्चा शुरू नहीं हुई है। अगर परिसीमन नहीं हो पाता है तो पुराने परिसीमन पर चुनाव कराए जा सकते हैं लेकिन जिला और जनपद अध्यक्षों सहित अन्य आरक्षण की प्रक्रिया तो आवश्यक है। इसके बिना पंचायत चुनाव की परिकल्पना नहीं की जा सकती है।

 

 

 

कांग्रेस का आरोप भाजपा डरी है तो भाजपा ने कहा हम तैयार है


प्रदेश कांग्रेस के चुनाव कार्य प्रभारी और प्रवक्ता जेपी धनोपिया का कहना है कि भाजपा पंचायत चुनाव कराने से डर रही है। इसको लेकर असमंजस की स्थिति है और यही वजह है कि अब तक आरक्षण प्रक्रिया पर ही कोई फैसला नहीं हो सका है। इधर, भाजपा के प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल ने कहा है कि पंचायत चुनाव दलीय आधार पर नहीं होते हैं लेकिन हमारे कार्यकर्ता चुनाव लड़ते हैं तो उसके लिए हम पूरी तरह से तैयार हैं। राज्य निर्वाचन आयोग भी अपना काम कर रहा है। इस बारे में राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव बीएस जामोद ने इस बारे में फिलहाल टिप्पणी करने से इनकार करते हुए बात को टाल दिया है।