Monday, February 6, 2023
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Gold Bond : सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम 2022-23 सीरीज III के लिए सब्सक्रिप्शन शुरू

Gold Bond: जो लोग सोना खरीदना चाहते हैं, उसमें निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए एक बार फिर सॉवरेन गोल्ड बॉऩ्ड स्कीम शुरु हो रही है जिसमें आप एक तरीके से सस्ता सोना खरीद सकते हैं। सोने के लिए अपने बजट के बराबर पैसा लगाकर शानदार मुनाफा हासिल कर सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने सोमवार को सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम 2022-23 सीरीज 3 का सब्सक्रिप्शन शुरू कर दिया है, जो पांच दिनों के लिए ओपन रहेगा। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का इशू प्राइस 999 शुद्ध सोने की कीमत के आधार पर तय होता। इस बार नई किस्त का इशू प्राइस 5409 रुपये प्रतिग्राम रखा गया है।

आरबीआई की ओर से जारी बयान में बताया गया कि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम 2022-23 सीरीज III के लिए सब्सक्रिप्शन अवधि 19-23 दिसंबर, 2022 तक रहेगी, जबकि इसके जारी होने की तिथि 27 दिसंबर रहेगी।

कौन खरीद सकता है सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड ?
आरबीआई की ओर से जारी नए सर्कुलर के अनुसार, कोई भी व्यक्ति, एचयूएफ, ट्रस्ट, यूनिवर्सिटी और चैरिटेबल संस्था सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड खरीद सकती है। किसी भी व्यक्ति या संस्था को कम से कम 1 ग्राम या उसके गुणज में सोना खरीदना होगा। एक व्यक्ति एवं एचयूएफ अधिकतम 4 किलो गोल्ड और ट्रस्ट एवं संस्थाएं अधिकतम 20 किलो गोल्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं।

Gold Bond
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ऑनलाइन खरीद पर मिलेगा डिस्काउंट
भारतीय रिजर्व बैंक के साथ एग्रीमेंट में, भारत सरकार ने उन निवेशकों को डिस्काउंट देने का फैसला किया है जो ऑनलाइन आवेदन करते हैं अगर कोई व्यक्ति या संस्था डिजिटल माध्यम से ऑनलाइन सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड खरीदती है, तो उसे प्रति ग्राम 50 रुपये का डिस्काउंट दिया जाएगा। इन निवेशकों के लिए गोल्ड बांड का निर्गम मूल्य रु. 5,359 रुपये प्रति ग्राम होगा।

SBI के माध्यम से सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) कैसे खरीदें

  1. क्रेडेंशियल्स का उपयोग करके एसबीआई नेट बैंकिग में लॉग इन करें
  2. मेन मेनू से ‘ई-सर्विस’ पर क्लिक करें
  3. ‘सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम’ पर क्लिक करें
  4. यदि आप पहली बार निवेश कर रहे हैं तो आपको रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
  5. हेडर टैब से ‘रजिस्टर’ चुनें, फिर ‘नियम और शर्तें’, फिर ‘आगे बढ़ें’.
  6. अपनी सभी डिटेल के साथ नॉमिनेशन और अन्य डिटेल जोड़ें
  7. NSDLया CDSL से डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट चुनें जहां आपका डीमैट अकाउंट है
  8. डीपी आईडी, क्लाइंट आईडी दर्ज करें और ‘सबमिट’ टैब पर क्लिक करें
  9. डिटेल की पुष्टि करें और ‘सबमिट’ टैब पर क्लिक करें
    10। रजिस्ट्रेशन के बाद हेडर टैब से ‘खरीदारी’ चुनें
  10. नॉमिनेशन क्वांटिटी, नॉमिनेशन डिटेल दर्ज करें
  11. अपना ओटीपी दर्ज करें और ‘पुष्टि करें’ पर क्लिक करें

ऑफलाइन कहां से खरीद सकते

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Gold Bond: आप सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को सभी बड़े बैंकों के माध्यम से खरीद सकते हैं, जैसे जैसे एसबीआई और एचडीएफसी बैंक। निर्धारित डाकघरों से भी इसकी खरीद हो सकती है। किसी भी लघु वित्त बैंक, भुगतान बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक से भी खरीद सकते हैं। इसके अलावा आप स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (SHCIL), क्लीयरिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (CCIL), एनएसई और बीएसई से भी इन बॉन्ड्स को खरीद सकते हैं।

क्या है सॉवरेन Gold Bond?
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड सोने में निवेश की सरकारी स्कीम है। भारत सरकार की ओर से RBI सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जारी करता है। इसमें भौतिक रूप से सोने की खरीद के बजाय डिजिटल गोल्ड में निवेश की सुविधा होती है। सरकार ने 2015 में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना शुरू की थी। इसके तहत वित्त वर्ष में 4 बार सब्सक्रिप्शन का मौका मिलता है। इस बार सब्सक्रिप्शन के लिए तीसरी सीरीज 19 से 23 दिसंबर तक खुली रहेंगी। इस वित्त वर्ष की चौथी सीरीज 6 से 10 मार्च तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगी. इससे पहले, जनवरी और अगस्त 2022 में SGB में निवेश की सुविधा दी गई थी।

एक बार में कितना Gold Bond खरीद सकते हैं?
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की मैच्योरिटी 8 साल की होती है. इस दौरान 2.5% की सालाना दर से ब्याज मिलता है, यानी 8 साल में 20 प्रतिशत ब्याज मिलेगा। 5वें साल से आपको विड्रॉल ऑप्शन मिल जाता है और ब्याज भी मिलने लगता है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में कम से कम एक ग्राम सोने का निवेश किया जा सकता है, और व्यक्तियों, एचयूएफ, और ट्रस्टों और अन्य समान संस्थाओं के लिए प्रत्येक वित्तीय वर्ष में निवेश की जा सकने वाला अधिकतम निवेश क्रमश: चार किलोग्राम, चार किलोग्राम और बीस किलोग्राम है। अच्छी बात ये है कि इसे नाबालिग के नाम पर भी खरीदा जा सकता है।

फिजिकल गोल्ड और सॉवरेन Gold Bond में क्या फर्क है
दरअसल, फिजिकल सोना खरीदने में कई दिक्कतें होती हैं। एक तरफ सोने की शुद्धता की चिंता तो दूसरी तरफ सोना खरीदने और गहने बनवाने पर GST और मेकिंग चार्ज भी देन पड़ता हैं। SGB बॉन्ड GST के दायरे में नहीं है, जबकि फिजिकल गोल्ड पर 3% GST लगता है। घर में सोना रखने पर उसकी सुरक्षा की भी चिंता रहती है। SGB पेपर फॉर्म में होता है, तो इसके रखरखाव में खर्च नहीं करना पड़ता। निवेश के नजरिये से फिजिकल गोल्ड के मुकाबले सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में पैसा लगाना बेहतर माना जा सकता है, क्योंकि बाजार में चाहे कितनी भी उथल-पुथल हो आपका नुकसान नहीं होगा।

सॉवरेन Gold Bond के फायदे
Gold Bond योजना का मकसद फिजिकल सोने की मांग को कम करना है। जैसे आपने सोना खरीदकर घर में रखा है और भाव बढ़ने का इंतजार करना होगा। लिहाजा गोल्ड बॉन्ड में पैसा लगाकर निवेशक सोने की सुरक्षा की मानसिक चिंता से भी मुक्त रह सकता है। यही कुछ खास वजहें हैं जिनके कारण लोगों की दिलचस्पी गोल्ड बॉन्ड में बढ़ रही है। साथ ही घरेलू बचत को वित्तीय बचत में बदलकर इसका ऐसा इस्तेमाल करना है ताकि इससे आम निवेशकों को सस्ता सोना मिले तो वहीं अर्थव्यवस्था को भी फायदा हो।

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