BJP SINGRAULI जिले की टीम में जमीनी कार्यकर्ताओं की हुई उपेक्षा

BJP SINGRAULI जिले की टीम में जमीनी कार्यकर्ताओं की हुई उपेक्षा

 

लंबे इंतजार के बात हुई घोषणा; जमीनी कार्यकर्ताओं में असंतोष

 

 

नगरीय निकाय चुनाव में डाल सकते हैं खलल ,सुर्खियों में पूनम गुप्ता

 

 

अनोखी आवाज़ सिंगरौली।  "माल खाए मियां....लात खाय डफाली" उक्त पुरानी कहावत आज भाजपा जिला पदाधिकारियों की घोषणा के बाद सटीक बैठ रही है. लंबे इंतजार के बाद भाजपा जिलाध्यक्ष ने प्रदेश नेताओं की सहमति पर बीते दिवस घोषणा की. किसे पता था कि कई वरिष्ठ नेता और जमीनी कार्यकर्ताओं की उम्मीदों पर पानी फिरने वाला है . ऐसे लोगों को जिम्मेदारी दी जाएगी जिन्हें पार्टी की रीति - नीति का रत्ती भर ज्ञान नहीं है लिहाजा कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष व्याप्त है जो आज की नगरीय निकाय चुनाव में देखने देखने को मिल सकता है।

 

 

 

जमीनी कार्यकर्ताओं को किया किनारे

एक से डेढ़ वर्ष के इंतजार के बाद जिला अध्यक्ष वीरेंद्र गोयल ने अपनी टीम की घोषणा की लेकिन सूची सामने आते ही विवादों का दौर शुरू हो गया जमीन कार्यकर्ता आशा लगाए बैठे थे की परिश्रम का फल मीठा होगा उन्हें क्या मालूम था कि उनके अरमानो पर अध्यक्ष पानी फेर देंगे और ऐसे लोगों को जिम्मेदारी दी जो आए दिन विवादों से गिरे रहते हैं। इस टीम में कई लोग ऐसे भी हैं जिन्हें पार्टी की नीति-रीती, सिद्धांतों का ककहरा भी नहीं मालूम लेकिन क्या किया जाए यह तो वही हाल हुआ पेड़ लगाए कोई और फल कोई और खाए।

 

 

 

 

सुर्खियों में पूनम...

 

वर्षों पहले तमाम जगहों पर सोनम गुप्ता का नाम सुर्खियों में था, यहां तक की नोटों पर भी लिखा मिल जाता था कि "सोनम गुप्ता" बेवफा है। वह अपनी वफाई का सबूत दे पाई अथवा नहीं यह तो पता नहीं चल सका लेकिन इन दिनों पूनम गुप्ता सुर्खियों में है हलांकि सोनम का पूनम गुप्ता से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है। लेकिन नाम के मिलेजोल में बस गुजरे दौर की याद आ गई।

पूनम गुप्ता के सुर्खियों में आने की वजह है अभी हाल ही में कार्यकारिणी का विस्तार। कार्यकारिणी विस्तार में इन्हें मंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई है। इससे पहले ज्ञात हो कि इन्हें विंध्यनगर मंडल में मंत्री बनाया गया था।  आखिर ऐसी भी अध्यक्ष के सामने क्या मजबूरी थी कि अन्य पार्टी से जुड़ी महिलाओं को दरकिनार कर इन्हें मंडल मंत्री से जिला मंत्री बना दिया..?

 

 

भाजपा से जुड़े कार्यकर्ता बताते हैं कि श्रीमती गुप्ता को पार्टी से जुड़े 1 वर्ष भी नहीं हुए हैं और इन्हें जिले की टीम में जगह दी गई। जो महिलाएं वर्षों से पार्टी के प्रति लगन, मेहनत, समर्पण से कार्य कर रही हैं उनको दरकिनार किया गया..? 

 

खैर विरोध के स्वर अभी दबे है जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि किसी वरिष्ठ नेता के आगमन पर असंतोष कार्यकर्ता हंगामा कर सकते है।

 

 

शेष अगले अंक में.....