धर्म। गज लक्ष्मी व्रत की पूजन विधि, इन मंत्रों से करें मां लक्ष्मी की पूजा, उन्हें इत्र, गंध और कमल का फूल अर्पित करें

धर्म। गज लक्ष्मी व्रत की पूजन विधि, इन मंत्रों से करें मां लक्ष्मी की पूजा, उन्हें इत्र, गंध और कमल का फूल अर्पित करें

 

 

 

 

 

धर्म। हर साल भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से महालक्ष्मी व्रत शुरू किया जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार आज गज लक्ष्मी का व्रत है. शास्त्रों में मां लक्ष्मी को धन की देवी माना जाता है. मान्यता है कि मां लक्ष्मी का पवित्र मन से पूजन करने से घर में धन-वैभव का आगमन होता है. आपको बता दें कि मां लक्ष्मी के 16 दिनों के महालक्ष्मी व्रत का समापन अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन होता है. इस दिन गज लक्ष्मी माता हाथी पर कमल के आसन पर विराजमान हो ऐसे स्वरूप का बड़े विधि-विधान से पूजन किया जाता है. गज लक्ष्मी व्रत के दिन विधि पूर्वक मां लक्ष्मी का पूजन कर उन्हें इत्र, गंध और कमल का फूल अर्पित करें व कमल गट्टे की माला से मंत्रों का 108 बार जाप करें. पूजा पाठ के बाद आरती करना न भूलें।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

मां लक्ष्मी को खुश करने के लिए मंत्र

 

ऊँ आद्य लक्ष्म्यै नम:

 

ऊँ विद्या लक्ष्म्यै नम:

 

ऊँ सौभाग्य लक्ष्म्यै नम:

 

ऊँ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नम:

 

ऊँ नमो भाग्य लक्ष्म्यै च विद्महे अष्ट लक्ष्म्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोद्यात

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

गज लक्ष्मी व्रत की पूजन विधि
व्रत के पूजन के दिन मां लक्ष्मी की सवारी गज यानि हाथी का भी पूजन करें. मान्यता के अनुसार, इस दिन मिट्टी के या फिर चांदी के हाथी की पूजा की जाती है. गज लक्ष्मी के व्रत वाले दिन सुबह उठकर स्नान करें. मां लक्ष्मी के सामने व्रत का संकल्प लें. विधि-विधान से मां लक्ष्मी की पूजा करें. मां को रोली-कुमकुम अक्षत लगायें. फूल माला मां को पहनाएं. पुष्प अर्पित करें. फल-मिष्ठान व प्रसाद से देवी को भोग लगाएं. आरती के बाद मंत्रों को उच्चारण करें. इस दिन भर फलाहार व्रत रख कर शाम को माता का पूजन करें. शाम को पूजा के स्थान पर आटे और हल्दी से चौक बना कर एक कलश की स्थापना करें. कलश के पास मां लक्ष्मी और हाथी की मूर्ति रखें. पूजा में सोने की कोई चीज जरूर रखें. मां लक्ष्मी और गज को धूप, दीप, नैवेद्य चढ़ाए व इत्र जरूर अर्पित करें. मां लक्ष्मी के मंत्रों और आरती गाकर लक्ष्मी मां की स्तुति करें.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

पढ़ें मां लक्ष्मी की आरती

 

ॐ जय लक्ष्मी माता,
मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निसदिन सेवत,
हर विष्णु विधाता ॥

 

उमा, रमा, ब्रम्हाणी,
तुम ही जग माता ।
सूर्य चद्रंमा ध्यावत,
नारद ऋषि गाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

 

दुर्गा रुप निरंजनि,
सुख-संपत्ति दाता ।
जो कोई तुमको ध्याता,
ऋद्धि-सिद्धि धन पाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

 

तुम ही पाताल निवासनी,
तुम ही शुभदाता ।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशनी,
भव निधि की त्राता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

 

जिस घर तुम रहती हो,
ताँहि में हैं सद्‍गुण आता ।
सब सभंव हो जाता,
मन नहीं घबराता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

 

तुम बिन यज्ञ ना होता,
वस्त्र न कोई पाता ।
खान पान का वैभव,
सब तुमसे आता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

 

शुभ गुण मंदिर सुंदर,
क्षीरोदधि जाता ।
रत्न चतुर्दश तुम बिन,
कोई नहीं पाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

 

 

महालक्ष्मी जी की आरती,
जो कोई नर गाता ।
उँर आंनद समाता,
पाप उतर जाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

 

ॐ जय लक्ष्मी माता,
मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निसदिन सेवत,
हर विष्णु विधाता ॥