शिवराज आज मंडला में 318 करोड़ के कामों का भूमिपूजन, बैगा परिवारों को पट्टा देंगे

शिवराज आज मंडला  में 318 करोड़ के कामों का भूमिपूजन, बैगा परिवारों को पट्टा देंगे

 

 

भोपाल. मध्य प्रदेश में 2023 में विधानसभा चुनाव  होने हैं। इसके लिए बीजेपी ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। सरकार की नजर आदिवासियों  पर है। 15 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भोपाल में जनजातीय गौरव दिवस  में शामिल हुए थे। इसके बाद एक हफ्ते का जनजातीय गौरव सप्ताह मनाया गया। 22 नवंबर को इसका समापन है। लिहाजा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आदिवासी बहुल इलाके मंडला जाएंगे। यहां वे 318 करोड़ के विकास कामों का भूमिपूजन करेंगे। साथ ही 148 बैगा परिवारों को पट्टा भी बांटेंगे। साथ ही शिवराज यहां के किला वार्ड भी जाएंगे, जहां शहीद आदिवासी नेता शंकर शाह-रघुनाथ शाह की मूर्ति स्थापित करने के लिए भी भूमिपूजन करेंगे।

 

मंडला में सीएम का ये कार्यक्रम

  • सम्मेलन में गोंड, बैगा समेत जिले की सभी प्रमुख जनजातियों के लोग शामिल होंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री गोंड राजवंश के राजाओं के प्रति सम्मान भी व्यक्त करेंगे। 
  • सभा स्थल पर जनजातीय जीवन संस्कृति पर आधारित प्रदर्शनी 'एक जिला-एक उत्पाद' में महिला स्व-सहायता समूह कोदों-कुटकी के उत्पाद प्रदर्शित करेंगे। विभिन्न योजनाओं के तहत हितग्राहियों को लाभान्वित करेंगे। 
  • मुख्यमंत्री जनजातीय महिला स्व-सहायता समूहों को 10 करोड़ रुपए का लोन और 5 हजार जनजातीय परिवारों को बांस के पौधे भी बांटेंगे। कार्यक्रम के दौरान स्थानीय कलाकार जनजातीय जीवन को दिखाती पेंटिंग को प्रदर्शित करेंगे।

 

कांग्रेस को भी याद आए आदिवासी

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 24 नवंबर को अनुसूचित जनजाति विधायकों  की बैठक बुलाई है। साथ ही 22 जिलों के 89 ट्राइबल ब्लॉक के पदाधिकारियों को भी बुलाया गया है। इस दौरान पंचायत चुनाव की तैयारियों को लेकर रणनीति  बनाई जाएगी।

 

 

आदिवासी बहुल इलाके में 84 विधानसभा क्षेत्र (सीटें) आते हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 84 में से 34 सीट पर जीत मिली थी। वहीं, 2013 में इस इलाके में 59 सीटों पर बीजेपी जीती। 2018 में पार्टी को 25 सीटों पर नुकसान हुआ। वहीं, जिन सीटों पर आदिवासी उम्मीदवारों की जीत और हार तय करते हैं, वहां बीजेपी को 16 सीटों पर ही जीत मिली। 2013 की तुलना में 18 सीट कम है। अब सरकार आदिवासी जनाधार को वापस बीजेपी के पाले में लाने की कोशिश में जुटी है। उधर, कांग्रेस भी आदिवासियों को पक्ष में कर सत्ता में आने की जुगत में है।