पटवारियो के लिये सिंगरौली बन गया मालखाना

पटवारियो के लिये सिंगरौली बन गया मालखाना

फिर सुर्खियो में आये बैढन पटवारी,अधिकारियो व नेताओं के बन रहे चहेते

 

 

 इनकी आड़ में कास्तकारो के साथ हो रही धोखाधड़ी,एक जमीन दो बार तरमीन का मामला

 

 अनोखी आवाज़ सिंगरौली। मै कभी आरएसएस का कार्यकर्ता हुआ करता था,आज जो भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष है उनके साथ उठना बैठना हुआ करता था। रही बात सिंगरौली की तो यहां के जो जनप्रतिनिधि हैं वों हमारे सभी कारखास हैं। दबीजुबांन में यह भी कहा जाता है कि मेरे रग-रग में भाजपा बैठी हुई हैं। यह बोल चर्चित पटवारी बैढन के हैं। हल्का पटवारी बैढन किसानों को काश्तकार नहीं मानते बल्कि इन्हें ग्राहक मानते है। इस तरह के बोल इसलिए बोल रहें है क्योंकि हल्का पटवारी बैढन के उपर कही न कही राजनीतिक संरक्षण प्राप्त हैं।

तभी तो रामलीला मैदान के पीछे स्थित एक जमीन की दो बार तरमीम करके फिर से सुर्खियों में आ गए हैं। जिला मुख्यालय बैढन का ह्दयस्थल पूरी तरीके से पटवारियों के लिए मालखाना साबित होता दिखाई दे रहा है। हल्का पटवारी बैढन जब से कार्य भार संभाले है तब से बैढन के काश्तकार काफी परेशान हैं। परेशान होने की वजह सबसे बडी यह मानी जा रही हैं कि इनके साथ कुछ ऐसे चिन्हित दलाल है जो जमीन की बारिकी से जानकारी रखते हैं। इन दलालों का सिर्फ ग्राहक खोजने का काम हैं। अभी चार माह पूर्व इनका मामला सुर्खियों में आया था लेकिन फिर से एक बार चर्चाओं में आते दिखाई दे रहें हैंं।

ऐसा ही एक मामला पुन: प्रकाश में आया है। जहां काश्तकार ने पटवारी के उपर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया है कि सन 2016 में एक महिला को अपने किसी निजी काम के लिए पैसे की जरूरत पड़ी तो उसने अपनी लगभग 10 डिसमिल जमीन जो उसे पुल्ली बंटवारे मिली थी उसको बेचने का प्रस्ताव रुपए 44 लाख में रखा।

चूंकि खसरे की नकल पर उसका नाम था और साथ में ऋण पुस्तिका थी तो मैंने उसके साथ सौदा रजिस्टर्ड एग्रीमेंट करा लगभग 10 लाख रुपये दे दिए। कुछ दिनों बाद यह बताया कि घर में कुछ विवाद चल रहा है और व्यवहार न्यायालय सिंगरौली से खरीद बिक्री पर रोक लग गई है। इसलिए फैसला आने तक आप को रुकना पड़ेगा। हमें न्यायप्रणाली पर पूरा यकीन था इसलिए हमने इस आश्वासन पर लगभग 5 साल इंतजार किया और इस दौरान महिला अपनी बेटी की शादी के लिए गहने और लगभग 8 लाख 2019 लेती गई। सन 2021 में हमें आश्चर्य उस समय हुआ जब अगस्त में हमारी इकरारशुदा चौहद्दी की जमीन जो कि आज भी उस महिला  के नाम पर खसरे में दर्ज है उसको उसके भाई  ने अपना बताकर बैढऩ के एक व्यापारी को बेच दिया।

 

हमने इस मामले में और जानकारी हासिल की तो पता चला कि सन 2019 में हमारी जिस इकरारशुदा जमीन पर तरमीम का प्रतिवेदन और रिपोर्ट पटवारी ने तहसीलदार को भेजा था उसे रोककर नये आवेदन को पूर्व के डेट में लेकर महिला के भाई के नाम तरमीन कर दिया गया। और उसको बेस बनाकर महिला के भाई ने उस भूमि का विक्रय कर दिया। यह तरमीम का काम भी न्यायालय से स्टे के दौरान किया गया। इस तरह की धोखाधडी बैढन पटवारी के द्वारा काश्तकारों के साथ की जा रही है।

 

 एसडीएम के यहां धूल फांक रही अर्जी

 

काश्तकार बिंदा देवी ने इसके लिए एसडीएम न्यायालय में अर्जी दी रखी है चूंकि बैढऩ पटवारी उमेश नामदेव इसमें बहुत अहम भूमिका निभा रहा है और बात.बात पर फ ीता लेकर काली स्कॉर्पियो में तीन चार गुर्गों के साथ आ जाता है और कुछ दलाल मुझे समझौते के लिए दबाव बना रहे हैं इसलिए मुझे हमेशा डर रहता है कि वर्तमान हल्का पटवारी अपने रसूख का फायदा उठाते हुए कहीं मुझे मिलने वाले न्याय में देरी ना करें। सूत्र तो यह भी बताते हैं कि हल्का पटवारी बैढन के पास ऐसे दलाल है जो कब और किसकी जमीन क्रय और विक्रय कराना है इसकी भी जानकारी रखते हैं। और आए दिन यह दलाल गुर्गें का भी रूप दिखाने लगते हैं।

 

दो दलाल सब पर भारी 

अपनी कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सुर्खियों में बने रहने वाले बैढन हल्का पटवारी उमेश नामदेव के स्टेट बैंक के समीप स्थित कार्यालय में दो दलाल हमेशा जमावड़ा लगाए बैठे रहते हैं और ज्यादातर काम इन्ही के इशारे पर होता है। कुल मिलाकर एक शब्दो मे कहा जाए कि मोटू-पतलू की जोड़ी सक्रिय है तो कोई अतिशयोक्ति नही होगी। जमीन में भी इन्हीं दो दलालों की भूमिका अहम है। हालांकि यह तो जांच के बाद ही दूध का दूध और पानी का पानी हो पाएगा लेकिन फिलहाल तो दो दलाल और पटवारी लपेटे में आ रहे है। और पटवारी नपते है तो सबसे बड़े जिम्मेदार यह दोनों दलाल ही होंगे

 

 

 

लगातार पढ़े सिर्फ-अनोखी आवाज़ नीरज द्विवेदी के साथ