सिंगरौली- आगामी नगरीय निकाय चुनाव में यदि भाजपा की नाव डूबती है तो जिम्मेदार बिजली विभाग होगा

सिंगरौली- आगामी नगरीय निकाय चुनाव में यदि भाजपा की नाव डूबती है तो जिम्मेदार बिजली विभाग होगा

 

 

 

 

 

बिजली की अघोषित कटौती से आम जनमानस त्रस्त, भाजपा की हो रही किरकिरी

 


अनोखी आवाज़ सिंगरौली। नगरीय निकाय चुनाव की तारीखों का भले ही अभी ऐलान नही हुआ है लेकिन कयास लगाए जा रहे है कि आगामी जनवरी तक किसी के भी सर पर ताजपोशी हो सकती है। लेकिन सिंगरौली में जो वर्तमान हालात है उसे देखकर ऐसा लगता है कि आगामी चुनाव में भाजपा की हालत खराब होने वाली है। ऐसा इसलिए क्योंकि बिजली की अघोषित कटौती ने जिलेवासियों का हाल बेहाल कर दिया है।

 

 


"दिपक तले अंधेरा" जैसे कहावते बड़े बुजुर्गों के मुँह सुना था लेकीन सिंगरौली में यह देखने को मिल रहा हैं। सिंगरौली की बिजली से कई अन्य राज्य जगमग हो रहे है लेकिन यहाँ के स्थानीय खून के आंसू रोने को मज़बूर है।

 

 

 

 

जनप्रतिनिधियो ने साधी चुप्पी,आम जनमानस त्रस्त

बिजली की अघोषित कटौती से आम जनमानस का बुरा हाल है। कुछ दिनों पहले जब बिजली गुल होती थी तो विभाग के पास बहाना रहा करता था कि मौसम खराब है,बारिश,आंधी है लेकिन बीते कुछ दिनों से न तो आंधी-तूफान आया न ही बारिश हुई फिर भी बिजली की आंख मिचौली का खेल जारी है। जिम्मेदार है कि बस दिलासा देकर कन्नी काट रहे है। लिहाजा आम जनमानस में आक्रोश व्याप्त है और भारतीय जनता पार्टी की  क्षेत्र में किरकिरी होना शुरू हो गई है। कही ऐसा न हो कि भाजपा की नाव डुबाने में बिजली विभाग जिम्मेदार हो। हालांकि जो वर्तमान में हालात है उसे देख कर तो ऐसा ही लगता है कि
की भाजपा की नाव गहरे खाई की तरफ जा रही है। चौकाने वाली बात तो यह है कि बिजली की आंख मिचौली की जानकारी भाजपा नेताओं सहित जनप्रतिनिधियों को भी बखूबी है लेकिन कोई भी मुंह खोलने के लिए तैयार नहीं है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 


क्या बिजली विभाग डुबायेगा भाजपा की नाव..?

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार आगामी कुछ महीनों में नगरी निकाय व ग्राम पंचायत के चुनाव होने हैं । ऐसे में चाहे शहर हो या ग्रामीण हर जगह बिजली के लिए हाहाकार मचा हुआ है। चौंकाने वाली बात तो यह है कि जब जिला मुख्यालय बैढन में बिजली का यह हाल है तो फिर शहर के अन्य क्षेत्रों और ग्रामीण इलाको का अंदाजा बखूबी लगाया जा सकता है। ऐसे में राजनीतिक पंडितों का मानना है कि ऐसे ही बिजली का खेल चलता रहा तो निश्चित ही भाजपा की नाव गर्त में चली जाएगी।