सिंगरौली: आम जनमानस में चर्चा का विषय बना पुलिस महकमे का स्थानांतरण

सिंगरौली: आम जनमानस में चर्चा का विषय बना पुलिस महकमे का स्थानांतरण

रावेंद्र द्विवेदी को विन्ध्यनगर से नवानगर थाने की मिली कमान

 

 


कारखास चिंतित, हेरफेर होने से  छिन सकता है चांदी का चम्मच..?

 

 

 

अनोखी आवाज़ सिंगरौली। मध्यप्रदेश में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को दृष्टिगत रखते हुए पुलिस अधीक्षक सिंगरौली वीरेंद्र सिंह ने पुलिस मुख्यालय के निर्देशानुसार दो थाना प्रभारियों और एक दर्जन से ज्यादा उप निरीक्षक, सहायक उप निरीक्षकों को इधर से उधर किया है। जैसे ही स्थानांतरण के आदेश की कॉपी सोशल मीडिया पर वायरल हुई लोग चुटकी लेना शुरू कर दिए।

       ज्ञात हो कि रावेंद्र द्विवेदी की शुरुआत यातायात थाने से हुई महज कुछ दिनों बाद उनका स्थानांतरण चितरंगी थाने के लिए जहा लगता है उन्हें वहां की आवो हवा रास नही आई  और कुछ ही दिनों बाद उन्हें माड़ा थाने की कमान सौंपी दी गई लेकिन वहां भी ज्यादा दिन उनका मन नहीं लगा और पुनः वे मुख्यालय की ओर चल पड़े लिहाजा विन्ध्यनगर थाने की उनको कमान मिली और अब उन्हें एक बार पुनः चर्चित थाना नवानगर  की जिम्मेदारी अस्थाई व आगामी आदेश तक के लिए एसपी ने सौंपी है।

आम जनमानस में चर्चा है कि क्या श्री द्विवेदी ऐसे ही विभिन्न थानों का भ्रमण करते रहेंगे..? उन्हें ग्रामीण इलाके के थानों की जिम्मेदारी क्यो नही मिलती ..? हालांकि एसपी ने यदि इन्हें नवानगर थाने की जिम्मेदारी सौपी है तो कुछ सोच समझ कर ही दिए होंगे। लेकिन शहर के अन्य थानों से नवानगर थाना थोड़ा भिन्न है यहां कई चुनौतियां हैं । इन चुनौतियों में डीजल, कबाड़, कोयला के अलावा यहां नशे का कारोबार भी तेजी से पांव पसार रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या इन ज्वलंत विषयों पर रावेंद्र द्विवेदी नियंत्रण लगा पाएंगे..? क्योंकि तत्कालीन थाना प्रभारी उमेश प्रताप सिंह की कार्यवाही से इस तरह के कारोबारियों में हड़कंप था,और बिल में दुबके गए थे।

 

 

बेचारे कारखास चिंतित

थाना प्रभारियों के हेरफेर के चलते करखासो के चेहरे पर उदासी है। चांदी की चम्मच से विभिन्न व्यंजनों का स्वाद चखने वाले बेचारे कारखासो का क्या होगा..? चिंतित होना भी लाजमी है क्योंकि मेहनत तो करना नहीं पड़ता था। बस बैठे-बिठाए कुर्सी तोड़ना था, ऐसे में थाना प्रभारियों के फेरबदल के कारण अब बिना काम के कुछ नहीं मिलने वाला। अब देखना यह होगा कि कारखास भी साहब के साथ पीछे पीछे जाते हैं या वहीं जमे रहते हैं।