सिंगरौली: डीईओ साहब पुरोहित वैश्य पर कब होगी कार्यवाही..?

सिंगरौली: डीईओ साहब पुरोहित वैश्य पर कब होगी कार्यवाही..?

मामला शासकीय विद्यालय कचनी का,भृत्य से गाली-गलौज करने को लेकर था सुर्खियों में

 

 

संवाददता- आशीष पाण्डेय,पंकज तिवारी

 

अनोखी आवाज़ सिंगरौली। शिक्षा के गुरु कहे जाने वाले मास्टर साहब अब गुरु नहीं हिटलर बन रहे हैं। शिक्षा रूपी विद्यालय में मनमानी रवैया अपना का विवाद कर रहें है। ऐसे कई मामले देखने सुनने को मिलते हैं। ऐसा ही एक मामला सिंगरौली जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कचनी के प्रभारी प्रचार्य का है। जानकारी  के अनुसार मामला प्रभारी प्रचार्य व भृत्य  के विवाद से जुड़ा हुआ है। बताया जाता है कि भृत्य महिला बीते महीनों विद्यालय में कुछ देर से पहुची।  जिससे नाराज प्रभारी प्रचार्य ने महिला को जमकर खरी- खोटी सुनाई इतना ही नही महिला ने तो अभद्रता करने की बात कहकर लगाकर कलेक्टर को भी अपनी पीड़ा सुनाई और कार्यवाही करने की बात रखी।

 

 

 


डीईओ की कार्यवाही पर उठे सवाल..कर्मचारियों में असंतोष

 

मामला बीते जुलाई-अगस्त माह का है जहाँ भृत्य महिला विद्यालय में 10 मिनट लेट पहुंचती है। जिससे नाराज प्रभारी प्राचार्य पुरोहित वैश्य ने भृत्य जमकर को खरी-खोटी सुना कर अभद्रता की थी। महिला ने भी प्रभारी प्राचार्य श्री वैश्य की शिकायत कलेक्टर के पास की थी। जहां कलेक्टर ने जांच के आदेश शिक्षा अधिकारी रोहणी प्रसाद पाण्डेय को दिया था। जहां प्रभारी प्राचार्य के खिलाफ जांच टीम गठित कर जांच के आदेश दिए थे। टीम की जांच में पाया गया कि प्रभारी प्रचार दोषी पाए गए। लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी ने कोई ठोस कार्यवाही नहीं कर बल्कि चेतावनी पत्र जारी कर आदत सुधारने को कहा और इतने में जांच समाप्त कर दिया। जिससे डीईओ के इस कार्यवाही पर सवाल उठ रहे है और कर्मचारियों में असंतोष व्याप्त है।

 

 

 

 

 


कही राजनीतिक पकड़ के कारण तो पुरोहित पर इतनी मेहरबानी

 


विद्यालय को शिक्षा का मंदिर व विद्यालय के मंदिर का देवता का दर्जा शिक्षकों को प्राप्त है। लेकिन वही शिक्षक जब हिटलर बनकर तानाशाह करने लगते हैं। हालांकि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कचनी के प्रभारी प्राचार्य श्री वैश्य अपने रवैए को लेकर चर्चाओं में बने रहते है। भृत्य महिला और प्रभारी प्राचार्य से जुड़े विवाद में दोषी पाएं जानें के बाद भी  डीईओ ने भी ठोस कार्यवाही न कर केवल चेतावानी पत्र कर जांच पूर्ण कर दी गई। जिससे स्टॉफ में आक्रोश व्याप्त है। कार्यवाही न होने के कारण आम जनमानस में चर्चा है कि उच्च राजनीतिक पकड़ होने का कारण शायद डीईओ कार्यवाही करने में इतना  संकोच कर रहे है। हालांकि चेतावनी देकर बहाल करने के पीछे डीईओ साहब का क्या उद्देश्य रहा होगा ये तो वही बता सकते है।