पितृ पक्ष में इन 5 बातों का रखें खयाल, तभी मिलेगी पितरों को संतुष्टि

पितृ पक्ष में इन 5 बातों का रखें खयाल, तभी मिलेगी पितरों को संतुष्टि

 

धर्म। पितृ पक्ष 2021की शुरुआत 20 सितंबर से हो चुकी है. इन दिनों को पूर्वजों के उपकार चुकाने के दिन कहा जाता है. मान्यता है कि इन दिनों में पितृलोक में जल का अभाव होता है, ऐसे में हमारे पितर पृथ्वी लोक पर अपने वशंजों के पास भोजन और जल ग्रहण करने के लिए आते हैं. श्राद्ध और तर्पण के जरिए वशंज अपने पूर्वजों का कर्ज चुकाते हैं।

इसीलिए इन दिनों को श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है. माना जाता है कि श्राद्ध पक्ष में यदि पितर अपने बच्चों से प्रसन्न होकर ​जाएं तो परिवार को उनका आशीर्वाद मिलता है और ऐसे परिवार में धन-धान्य, सफलता, वंश आदि किसी चीज की कमी नहीं होती. अगर आप भी इस श्राद्ध पक्ष में अपने पितरों को संतुष्ट करना चाहते हैं तो 5 बातों का विशेष खयाल रखें.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

पितृ पक्ष में इन 5 बातों का रखें खयाल

 

 पितृपक्ष के दौरान किसी भी विशेष चीज की खरीददारी से परहेज करें और किसी तरह का मांगलिक काम बिल्कुल न करें. पितृ पक्ष अपने पूर्वजों को याद करने के दिन होते हैं, ऐसे में आपके मांगलिक कार्यों से उन्हें महसूस होगा कि आपके मन में उनके न होने का कोई दुख नहीं है. इसलिए अगर आपको कोई शुभ समाचार पितृ पक्ष के दौरान मिल जाए, तो भी उसका सेलिब्रेशन पितृ पक्ष के बाद ही करें.

कहा जाता है कि पितृपक्ष के दौरान हमारे पूर्वज किसी भी रूप में हमारे पास आ सकते हैं. ऐसे में किसी कीट पतंगे, पशु और पक्षी का निरादर न करें. न ही उन्हें किसी तरह की चोट पहुंचाएं.

 

 

 

 

 

 

 

अपने घर के बाहर खाने और पानी के बर्तन रखें, ताकि जानवरों और पशु पक्षियों को खाने पीने में आसानी हो. माना जाता है कि इस दौरान पशु पक्षियों आदि की सेवा करने से पितर प्रसन्न होते हैं.

 

 पितृ पक्ष के दौरान चना, मसूर, जीरा, काला नमक, लौकी, सरसों, खीरा और मांस आदि के सेवन से बचना चाहिए. शराब आदि भी नहीं पीनी चाहिए. जो लोग तर्पण करते हैं, उन्हें विशेष रूप से इस बात का खयाल रखना चाहिए.

 

 तर्पण करते समय काले तिल का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए. श्राद्ध के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराने से पहले भोजन के पांच हिस्से देवता, कौआ, गाय, कुत्ता और चींटियों के लिए निकालना चाहिए.