मुद्दे की बात- ऐसा क्या है ऊर्जाधानी में..? जो आता है जाने का नाम नहीं लेता..?

मुद्दे की बात- ऐसा क्या है ऊर्जाधानी में..? जो आता है जाने का नाम नहीं लेता..?

मुद्दे की बात नीरज द्विवेदी के साथ

 

 

 

अनोखी आवाज़ सिंगरौली। अक्सर लोगों के मन में एक सवाल उठता होगा कि आखिर ऊर्जाधानी में ऐसा क्या है जो यहां एक बार आ जाता है। जाने का नाम ही नहीं लेता। कभी काला पानी के नाम से संबोधित किया 

जाता था और बताया जाता है कि किसी की अधिकारी - कर्मचारी को सजा देने हो तो सिंगरौली ट्रांसफर कर दिया जाता था लेकिन आज ठीक इसके विपरीत है। आज तो बकायदा पैसे देकर लोग यहाँ आना चाहते है।

 

 

 

लाखों लोगों के मन में उठ रहे इस सवाल का जवाब यदि मैं अपने व्यक्तिगत विचारों से दूँ तो यह कहूंगा के सिंगरौली की जनता कुंभकर्णी निंद्रा में बुजदिल है। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां के लोगों का आए दिन शोषण हो रहा है कभी बाहरी लोग, तो कहीं पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों और कंपनी के लोगों द्वारा।लेकिन कोई व्यक्ति आवाज उठाने को नहीं सोचता सिर्फ इसलिए कि मेरे साथ नहीं हो रहा है,जिसके साथ हो रहा है वो समझे।

 

 

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लोगों की इस बुजदिली के कारण आक्रामकताओ के हौसले बुलंद हो जा जाते हैं और लोगों की बेबसी का फायदा उठाकर उनका शोषण करते हैं।

 

 

अब देख लीजिए न- यहां जो भी पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी एक बार आता है, वह यही का हो जाता है। कोई बोलने वाला नहीं जनप्रतिनिधि भी गांधी जी की मुस्कान से मदमस्त है। उदाहरण के तौर पर एसडीएम विकास सिंह को ही देख लीजिए, ना जाने कब से यहां जमे हैं। कभी देवसर, कभी माड़ा, तो कभी जिले से कुछ दूर और अंत में यही आना है।

 

 

 

 

और भी उदाहरण है थाना प्रभारी आरपी सिंह का ही देख लीजिए यहां कई वर्षों तक रह चुके हैं न जाने इनका सतना में क्यों नहीं मन लगा आखिरकार फिर यहीं चले आए। और सुन लीजिए हलांकि अभी यह केवल सुनी सुनाई बातें है,टीआई अर्चना द्विवेदी, अनिल उपाध्याय, नरेंद्र सिंह रघुवंशी का आगमन भी जल्द होने वाला है। और इसके पीछे यह कहे कि जनप्रतिनिधियो का बहुत बड़ा हाथ है, तो कोई बड़ी बात नहीं होगी।

 

 

 

 

 

 

 


मुद्दे की बात तो यह है कि यहां की जनता को इतना दबा दिया गया है कि वह अपने अधिकारों व कर्तव्यों को भूल चुकी है। जिस कारण गलत के खिलाफ भी खुलकर विरोध नहीं कर पाते और बार-बार जिले में आने वाले लोग खूब धन उगाही करते हैं। तरह- तरह के अवैध कार्यों को संरक्षण देते हैं इन जनप्रतिनिधियों से भी क्या उम्मीद करना यह भी पैसे के भूखे हैं। और भूख हो भी क्यों न ... चुनाव में जनता को भी तो शराब, कबाब, चाहिए खैर एक बात बिल्कुल भी समझ में नहीं आ रही है ऐसा कब तक चलता रहेगा? कब तक धन उगाही के लिए लोगो का आना जाना लगा रहेगा।