तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की ओर बढ़ा पहला कदम, कानून वापसी का प्रस्ताव मोदी कैबिनेट से मंजूर

तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की ओर बढ़ा पहला कदम, कानून वापसी का प्रस्ताव मोदी कैबिनेट से मंजूर

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  के ऐलान के बाद आज कृषि कानूनों को वापस लेने का पहला पड़ाव पूरा होगा. आज प्रधानमंत्री आवास पर कैबिनेट की बैठक होनी है. इस बैठक में तीनों कृषि कानूनों की वापसी का बिल को मंजूरी दी जाएगी. इसके बाद इस बिल को 29 नवंबर से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया जा सकता है. 

 

 

लोक कल्याण मार्ग में होने वाली इस कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री मोदी भी मौजूद रहेंगे. बताया जा रहा है कि कृषि मंत्रालय ने पीएमओ की सिफारिश पर कानून रद्द करने का बिल तैयार किया है. 

 

क्या हैं वो तीन कृषि कानून?

1. कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020

2. कृषक (सशक्तिकरण-संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020

3. आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020

 

जिस तरह कानून बनाने के लिए संसद की मंजूरी जरूरी होती है, उसी तरह रद्द करने के लिए भी संसद की मंजूरी जरूरी है. कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद इस बिल को संसद में पेश किया जाएगा. इस बिल पर बहस होगी और वोटिंग होगी. इसके बाद बिल पास होते ही तीनों कृषि कानून रद्द हो जाएंगे. 

 

आखिर क्यों वापस लेना पड़ा सरकार को कानून?

जून 2020 में मोदी सरकार इन तीनों कृषि कानूनों का अध्यादेश लेकर आई. उस समय भी इनका विरोध हुआ. उसके बाद सितंबर में ये तीनों कानून हंगामे के बीच पास हो गए. उसके बाद 27 सितंबर 2020 को राष्ट्रपति ने भी इन्हें मंजूरी दे दी. कानून बनने के बाद किसान संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. इसके बाद 26 नवंबर को पंजाब, यूपी, हरियाणा समेत कई राज्यों के किसान दिल्ली बॉर्डर पर जम गए और आंदोलन शुरू कर दिया.

 

सरकार और किसान संगठनों के बीच कई बातचीत भी हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. सरकार किसानों के हिसाब से संशोधन को तैयार थी लेकिन किसान कानून वापसी पर अड़े रहे. करीब सालभर से चल रहे आंदोलन के आगे सरकार को झुकना पड़ा और 19 नवंबर को प्रधानमंत्री मोदी ने तीनों कानूनों को रद्द करने की घोषणा की.