ये है SINGRAULI CONGRESS- जब मुसीबत में अकेल पड़े मंत्री जी..छोड़ दिया अपनो ने साथ

ये है SINGRAULI CONGRESS- जब मुसीबत में अकेल पड़े मंत्री जी..छोड़ दिया अपनो ने साथ

 


मुद्दे की बात नीरज द्विवेदी के साथ


अनोखी आवाज़ सिंगरौली। यूँ तो आप सब भली-भांति जानते है कि मुसीबत में सबसे पहले अपने साथ छोड जाते है लेकिन ऐसी मुसीबत में जब सब साथ छोड़ दे तो क्या कहेंगे..? ऐसा ही कुछ हुआ  मंत्री जी के साथ। यू तो मंत्री जी के नाम के आगे पूर्व लग चुका है लेकिन फिर भी पार्टी के समर्पित व वरिष्ठ नेता है लेकिन भईया ये सिंगरौली कांग्रेस है यह सब सम्भव है।

 

 

 

 

 

 

 

 

हम बात कर रहे है कलेक्ट्रेट के घेराव वाले दिन की,बात कुछ यूं है की कांग्रेस नेता वंशमणि वर्मा किसी अपने व्यक्तिगत कार्य को लेकर विरोध प्रदर्शन नही कर रहे थे। मुझे लगता है कि कलेक्टर से उनका जर...जोरु.. जमीन इनमें से किसी का विवाद नही है। प्रदर्शन मंहगाई के विरोध में था जो कांग्रेस पार्टी के बैनर तले हो रहा था। 

ऐसे में जिस तरह के शब्द श्री वर्मा के मुंह से निकले वो गलत थे मैं उनका समर्थन नही करता लेकिन उनके इस अमर्यादित भाषा के पीछे  दो बात मुझे और समझ मे आई।  पहली बात तो यह कि जनता की समस्या सुनकर उसे सुलझाने के लिए कलेक्टर से बात किये होंगे वह समस्या हल न हुई होगी दूसरी बात मुझे कही न कही उम्र का भी लोचा समझ में आता है। हालांकि ऐसा  क्यो बोले यह बात वही बता सकते है।

 

 

 

 

 

 

 

 


हफ्तेभर बाद इस बात का जिक्र करना का मकसद सिर्फ इतना था कि बीते दिवस उनके जन्मदिन के अवसर पर शोशल मीडिया पर बधाई देने वालो का  तांता लगा था लेकिन जब संकट की घड़ी थी तब कोई साथ नही है यहाँ तक कि एक कांग्रेसी नेता ने तो यहाँ तक दिया कि वो उनके निजी विचार है पार्टी से कोई लेना देना नही है।

 

 

 

 

 

 

 

 

खैर मुद्दे की बात तो यह है कि यही कही कांग्रेस की जगह भाजपा होती तो शायद ऐसा नही होता। होता भी तो धरना प्रदर्शन,आन्दोलन सहित न जाने क्या क्या देखने को मिलता। लेकिन ये सिंगरौली कांग्रेस है यहाँ सब देखने को मिलेगा। जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में कार्यक्रम का आयोजन था वह भी मुकदमे को लेकर सामने नही आये। उनको सामने आना चाहिए था अब वो क्यो सामने नही आये यह उनका व्यक्तिगत मामला है। हालांकि भास्कर मिश्रा श्री वर्मा के साथ खड़े दिखे थे।