..जब अध्यक्ष की ताजपोशी के लिए अध्यक्ष के पास Apple लेकर पहुचे महाशय

..जब अध्यक्ष की ताजपोशी के लिए अध्यक्ष के पास Apple लेकर पहुचे महाशय

अनोखी आवाज़@खरी-खरी
नीरज द्विवेदी "राज"

 

आज तो मैं खरी-खरी कहता हूं,बुरा नहीं लगना चाहिए,क्योंकि मैं जो देखता और सुनता हूं वही कहता हूं। यदि फिर भी बुरा लगता है तो मै क्या करूँ..?

 

 

 

अध्यक्ष बनने के लिए अध्यक्ष के पास शक्तिमान के वास्तविक नाम वाले तवारी जी एप्पल लेकर पहुचे थे... लेकिन निराश लौटना पड़ा। आप सबको शायद अब तक कुछ समझ नहीं आया होगा...? लेकिन इतना समझ लीजिए कि ये न उस एप्पल की बात है ना लाल वाले एप्पल की। ये बात कटे हुए एप्पल की है। 

 

 

जी हाँ नीचे पढ़ने के बाद आप भी भली भांति समझ जाएंगे लेकिन अक्षरसः समझने के लिए आपको राजनीति की समझ होनी चाहिए।


राजनीति की समझ रखने वाले बंधु भली-भांति जानते है कि  इन दिनों भाजपा युवा मोर्चा के लिए अध्यक्ष की ताजपोशी होने वाली है। ऐसे में सिंगरौली में अध्यक्षी के लिए ऐसे होड़ मची है मानो ओबी कंपनी में सुपरवाइजर की भर्ती निकली हो।

होड़ और प्रतिस्पर्धा आखिर हो भी क्यो न..? वर्तमान दावेदारों ने पिछले अध्यक्ष का कार्यकाल बेहद करीब से देखा है...उनके जलवा पानी से बखूबी वाकिब है। एक लाइन मे यदि यह कहा जाए कि क्या से क्या हो गए देखते देखते तो शायद अतिशयोक्ति नही होगी...?

अब यह जरूरी तो नही की हर किसी के भाग्य में यह योग लिखा हो। फिर भी बेचारे तवारी जी अरमान सजाये बैठे है,क्या पता उम्र सीमा के बाउंड्री पर खड़े उनका नम्बर लग जाये। बताया जाता है कि संगठन ने युवा मोर्चा अध्यक्ष के लिए उम्र के बंधन से बांध दिया है। 

 

 


खैर कहानी यहाँ से मोड़ लेती है। जब दिल में अरमान सजाए प्रदेशाध्यक्ष से मिलने पहुंचे तवारी जी... बकायदा नेताओ वाले पोषक में मिठाई का डिब्बा,पुष्पहार और एक Apple भेंट करना चाहा। Apple का आशय iPhone से है। परिचय हुआ,सेल्फी हुई,मिठाई खिलाई लेकिन जैसे ही 1 से डेढ़ लाख रुपये वाला iPhone12 देकर अपनी इच्छा व्यक्त की वैसे ही उन्हें निराशा भरा जबाब सुनने को मिला "अभी बहुत समय है गठन में , जब समय आएगा तो देखा जाएगा..अब क्या था हताश..निराश होकर बेचारे तवारी जी ऊर्जाधानी की ओर चल पड़े। जले पर तब किसी ने नमक छिड़क दिया जब किसी ने उनके हाथ मे इतना मंहगा चमचमाता iPone देखकर मजे-मजे में पूछ बैठा। क्योकि उनसे जुड़े लोग जानते है कि तवारी जी कुछक महीने पहले तो Oppo,vivo जैसे कंपनियों  की मोबाइल के शौकीन थे अचानक ये डेढ़ लाख रुपये का फ़ोन कैसे...?? अब क्या इतना सुनकर तवारी जी अपनी दर्दभरी दास्तान बताने लगे फिर क्या यह बात जंगल मे आग की तरह फैल गई।

 

जब यह बात मऊगंज वाले मिश्रा जी को पता चली फिर भला वो कहा चुप बैठने वाले थे..?

 

 

मिसिर जी हमसे कहिन -  "दादू ई बन जइहि त...सिंगरौली की लूट खइही.. तू पंचे इनके जनबा.. हम बड़े अच्छे से जानी थे।
एक बार तू हमरे आदमी के अध्यक्ष बनवा के देखय फिर तोहका पता चली अध्यक्षी का होत है और कोने मेर क चलावल जात  है..सीधा-सीधा तू ई समझ ल की तुहिन अध्यक्ष लागय ऐह से ज्यादा अब हम कुछु न कहब।

हम इहो जानी थे कि तोहके नजरअंदाज कइके ई कुछु ब बन पाइहि... काहे से की हम तोहके अच्छे से जानी थे मेश्राम की कहा पहुँचा देह"..ये बात अगल है कि सुभाष भूल गय..?

ये तो थी मिसिर जी बातें यदि कायदे से हमसे कोई राय मांगे तो मैं संगीतकार जगजीत सिंह जी की ग़ज़ल.. होठो से छू ओ...मेरा गीत अम्र कर दो... की चार पंक्तियों से बात रखता... वह यह कि

 

ना उम्र की सीमा हो...

ना जाति का हो बंधन।

जब अध्यक्ष चुने कोई ...

तो न देखे केवल धन...

नई रीति चलाकर तुम (वैभव) नई टीम खड़ी कर दो।

 

 

 

खैर हमसे पूछने तो कोई आएगा नही लेकिन ये खबर तो पहुच सकती है। मैं अपने खरी-खरी में मुफ्त की सलाह सबको देता हूं,लेकिन तवारी जी को क्या दु..सब सलाह तो मिसिर जी दे दिए। लेकिन नही दूंगा तो क्या पता तवारी जी नाराज हो जाये । खैर इतना क्या सोंचना वो तो जयंत वाले मामले से पहले से ही हमसे रूठे है। लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि थोड़ा गंभीर बनिये...जितना ऊपर से दिखाने का प्रयास करते है उतना अदंर से है नही...मैं ऐसा इसलिए कह रहा हु क्योकि आपका नाम एक गंभीर..सादगी वाले नेता से जुड़ता है। बाकी आपकी मर्जी...अध्यक्ष बने तो भी ठीक नही बने तो भी ठीक।

 

कुछ और बाकी  है कहानी...जो जल्द आप पढ़ेेंगे मेंरी  जुबानी