Women Health: PCOS में महिलाओं की फर्टिलिटी पर पड़ता है असर

Women Health: PCOS में महिलाओं की फर्टिलिटी पर पड़ता है असर

 

 

हॉर्मोन्स में बैलेंस बिगड़ने के कारण महिलाओं में पीरियड्स शुरू होने के बाद पीसीओएस की समस्या हो जाती है। पी सी ओ एस का फुल फॉर्म पोल्य्सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम है । इससे महिलाओं की ओवरीज की फंक्शनिंग  पर असर पड़ता है।

 

PCOS के लक्षण-

• वजन बढ़ना

• थकान और mood swings होना

• चेहरे की त्वचा का oily होना

• चेहरे या चेस्ट के ऊपरी हिस्से में मुँहासे होना

• Hair fall

• infertility

• गर्भधारण करने में मुश्किल होना

 

• शरीर में androgen लेवल high होना

• फेशियल या बॉडी हेयर की बहुत growth होना

• irregular पीरियड्स या फिर पीरियड की cycle लंबी होना

• सामान्य पीरियड्स और heavy periods के बीच में 35 दिन का अंतर होना।

ऐसे संकेत मिलें तो तुरंत ही अपने डॉक्टर से इस बारे में बात करनी चाहिए। पीसीओएस को diagnose करने का कोई एक test नहीं है। आमतौर पर यह समस्या पहले पीरियड के बाद होती है, परंतु कुछ महिलाओं में इसके लक्षण बाद में भी नजर आते हैं। डॉक्टर medical history की जाँच करते हुए years और weight में आने वाले बदलाव को देखते हैं। डॉक्टर निम्नलिखित जाँचों के द्वारा यह जानने की कोशिश करते हैं कि हार्मोनल इम्बैलेंस (hormonal imbalance) क्यों हो रहा है।

 

फिजिकल एग्जामिनेशन (Physical Examination)

इसमें डॉक्टर ब्लड प्रेशर, कमर का आकार, चेहरे सीने या पीठ पर अतिरिक्त हेयर ग्रोथ, मुँहासे, skin discolouration जैसे लक्षणों पर ध्यान देते हैं।

पेल्विक एग्जामिनेशन (Pelvic Examination)

इसमें reproductive organs की जाँच की जाती है। जिससे कि यह पता चले कि किसी हिस्से की growth abnormal तो नहीं है।

पेल्विक अल्ट्रासाउंड (Pelvic Ultrasound)

इसमें ovary में cyst और endometrium की जाँच की जाती है।

ब्लड टेस्ट (Blood Test)

इसके जरिए डॉक्टर cholestrol level, diabetes और दूसरे hormones जैसे thyroid, androgen आदि की जाँच करते हैं।

आइए जानते हैं पीसीओएस के ट्रीटमेंट के तरीके-

आमतौर पर जनरल प्रैक्टिशनर्स इसकी ट्रीटमेंट करते हैं। इस बीमारी का इलाज पूरी तरह से संभव नहीं हो पाता है। दवा और lifestyle changes के द्वारा इस को treat करने की कोशिश की जाती है पीसीओएस ट्रीटमेंट में महिलाओं को होने वाली हेल्थ प्रॉब्लम्स जैसे infertility, obesity जैसी समस्याओं का निदान किया जाता है। अगर इसके लक्षण समय पर पहचान में आ जाएँ तो लाइफ स्टाइल में बदलाव और सही इलाज के जरिए इसे प्रभावी तरीके से मैनेज किया जा सकता है।