क्षेत्र में फैलता नशा और अवैध कारोबार बना बड़ी चुनौती, कुर्सी पर मंडराने लगे संकट के बादल
अनोखी आवाज़ Singrauli News। बरगवां थाने की कमान जब से समीर वारसी ने संभाली है, तब से क्षेत्र में नशे के कारोबारियों का तांडव थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसके साथ ही अवैध कारोबारों में लगातार हो रही बढ़ोतरी भी थाना प्रभारी के सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़ी हो गई है। हालात यह हैं कि पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर क्षेत्र की जनता में आक्रोश की ज्वाला धधक रही हैं और कब यह विस्फोट हो जाये यह कहा नहीं जा सकता। नवागत पुलिस अधीक्षक के जिले में पदभार संभालने के बाद अब पुलिस महकमे में बड़े फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं। और इस बात की चर्चा जोरों पर है कि सिंगरौली महोत्सव के बाद या अगले कुछ दिनों में बरगवां टीआई की कुर्सी छीन सकती हैं। बरगवां थाना क्षेत्र में लगातार मिल रही शिकायतों और बिगड़ती कानून व्यवस्था को देखते हुए एसपी द्वारा समीक्षा की जा रही है।
जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए साहब!
बरगवां थाना क्षेत्र में पहले से ही नशे का कारोबार, कबाड़ माफियाओं की सक्रियता, कोयला चोरी और अन्य अवैध गतिविधियां संचालित होती रही हैं। जब समीर वारसी ने थाना प्रभारी के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी, तब लोगों को उम्मीद जगी थी कि इन अवैध कारोबारों पर अंकुश लगाएंगे लेकिन हुआ ठीक इसके विपरीत।
हालांकि शुरुआती कुछ महीनों तक कारोबारी चोरी-छिपे अपना नेटवर्क चलाते रहे, लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि अवैध कारोबारी खुलेआम अपने मंसूबो को को अंजाम दे रहे हैं। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि पुलिस की ढिलाई के कारण अपराधियों और माफियाओं के हौसले बुलंद हो गए हैं।
जाते-जाते कुछ तो कर जाइए साहब?
बरगवां क्षेत्र की जनता इन दिनों कई समस्याओं से जूझ रही है। आए दिन चोरी की घटनाएं सामने आ रही हैं, गली-गली में अवैध शराब की बिक्री हो रही है और मेडिकल नशे का कारोबार भी चरम पर पहुंच चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन सभी मामलों की कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें बरगवां पुलिस से की गईं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ आश्वाशन मिलता रहा और कारोबारियों के हौसले बुलंद होते गए। जिस कारण क्षेत्र की जनता में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही हालात नहीं सुधरे तो आंदोलन की स्थिति बन सकती है। वहीं दूसरी ओर यह चर्चा तेज हो गई है कि बरगवां थाना प्रभारी की कुर्सी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं और समय रहते अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया और कारखास पर नियंत्रण नहीं लगाया तो जल्द विदाई हो सकती है।


