15 कैदियों को मिली रिहाई,स्वतंत्रता दिवस पर हुए रिहा
Rewa News: स्वतंत्रता दिवस का दिन कल 15 कैदियों के लिए नया सवेरा लेकर आया। इन सभी कैदियों की सजा में माफी का लाभ देकर स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रिहा किया गया,, जेल अधीक्षक द्वारा सभी कैदियों को पूरे सम्मान के साथ उन्हें जेल से रिहा किया ।
रिहा हुए कैदियों में रीवा, उमरिया, सीधी, शहडोल, अनूपपुर, सिंगरौली और प्रयागराज के रहने वाले है। जानकारी के अनुसार हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जेल से कैदियों को रिहा किया जाता है। ऐसे कैदी जो आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे होते है उन्हें उनके अच्छे आचरण का देखते हुए सजा में छूट का लाभ देकर रिहा कर दिया जाता है,, आज ऐसे ही कैदियों को केंद्रीय जेल रीवा से रिहा किया गया है जिन्हें सजा में माफी का लाभ मिला है,,15 अगस्त के अवसर पर राज्य शासन की स्वीकृति के बाद 15 कैदियों को रिहा किया गया जिसमें एक महिला कैदी शामिल है। ये सभी कैदी हत्या के अपराध में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे थे। जेल अधीक्षक ने बताया की 14 वर्ष सुखी और 6 वर्ष माफी मिलाकर राज्य शासन से पात्र इन कैदियों को रिहा किया गया है।

इनको मिली रिहाई
जेल प्रशासन के मुताबिक, इन कैदियों की रिहाई के लिए राज्य शासन को प्रस्ताव भेजा गया था. शासन द्वारा निर्धारित रिहाई के मानदंड पूरे करने के बाद उन्हें 15 अगस्त के अवसर पर सजा में छूट का लाभ दिया गया. रिहा होने वाले कैदियों में मिठाई लाल कोल, अमरीश नामदेव, बृजेश बैगा, सोनू बर्मन, केमला वासुदेव, सुरेंद्र प्रसाद शुक्ला, शिवकुमार महारा, राजकुमार, पालन और सबलाल, रंगलाल यादव, महिला कैदी लीलावती गोंड, उमाशंकर गौतम, शिव संपत निषाद, राम दयाल चौकसे और राम खेलावन शामिल हैं.
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जेल अधीक्षक एसके उपाध्याय ने बताया कि सभी कैदी रिहाई के निर्धारित मानदंडों को पूरा कर चुके थे. नियमों के तहत 14 वर्ष की वास्तविक सजा और माफी सहित कुल 20 वर्ष की अवधि पूरी करने के बाद उन्हें रिहाई का लाभ दिया गया. जेल अधीक्षक ने बताया कि जेल में रहने के दौरान कैदियों को विभिन्न प्रकार का व्यावसायिक प्रशिक्षण भी दिया गया है, ताकि रिहाई के बाद वे अपने हुनर के माध्यम से जीविकोपार्जन कर सकें. उन्होंने रिहा होने वाले कैदियों से अपील की कि वे जेल से बाहर निकलने के बाद ऐसा कोई कृत्य न करें, जिससे उन्हें दोबारा जेल आना पड़े.
पापों का प्रायश्चित किया
वहीं रिहाई के बाद उमाशंकर गौतम ने कहा कि उन्होंने जेल में रहते हुए अपने किए पर प्रायश्चित किया है. उन्होंने कहा कि मैं अपने पूर्व जन्मों के कर्मों के कारण जेल में था, यह विधि का विधान है और मैंने अपने पापों का प्रायश्चित किया. स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर केंद्रीय जेल रीवा से हुई इन कैदियों की रिहाई उनके लिए नई शुरुआत का अवसर है. अब जेल प्रशासन को उम्मीद है कि प्रशिक्षण के जरिए आत्मनिर्भर होकर ये सभी समाज की मुख्यधारा में लौटेंगे.
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