सुंदर का प्रिंस प्रेम समझ के परे!
अनोखी आवाज़@खरी-खरी
नीरज द्विवेदी “राज”
मैं तो खरी-खरी कहता हूं, बुरा नहीं लगना चाहिए,क्योंकि मैं जो देखता और सुनता हूं; वही कहता हूं, यदि फिर भी बुरा लगता है तो मैं क्या करूं?
सुंदर का प्रिंस प्रेम ! हां आप बिल्कुल सही पढ़ रहे हैं, इन दिनों ऊर्जाधानी में युवा मोर्चा के नए अध्यक्ष की ताजपोशी को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज है। अध्यक्ष की कुर्सी के लिए दर्जनभर युवा दावेदारी कर रहे हैं। लेकिन इन दावेदारों में एक नाम की चर्चा हर जुबां पर है.. वह नाम है प्रिंस केसरी… जिसे कुछ लोग प्रिंस गुप्ता तो कुछ शराब कारोबारी के नाम से जानते और पहचानते हैं… जनाब युवा मोर्चा का अध्यक्ष बनने के लिए कुछ भी करने को तैयार है..साम..दाम.. दंड..भेद और तन..मन… धन हर तरह से एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं।
लेकिन शायद यह भूल जा रहे हैं यह कांग्रेस या अन्य दल नहीं है ,यह भारतीय जनता पार्टी है.. यहां धन और बाकी चीजे बाद में पहले राष्ट्रप्रेम अनुशासन और साफ सुथरी छवि का होना आवश्यक होता है.. लेकिन दुर्भाग्य जनाब में अनुशासन नाम की कोई चीज है ही नहीं… और इनकी छवि के बारे में न ही पूछिये.. ज्यादा लंबा चौड़ा लिखने की बजाय एक शब्द में कहूँ की … ब्रो… राजनीतिक दृष्टि से अभी वयस्क नहीं हुए हैं तो शायद अतिश्योक्ति नहीं होगी। फिर भी ब्रो के हौसले बुलंद है और मां लक्ष्मी की असीम कृपा के बल बूते पर अन्य दावेदारों से दबी जुबान कहते फिर रहे हैं कि…. क्यों पैसा और समय बर्बाद कर रहे हो ..होना तो मेरा ही हैं…इस तरह के हौसले और बयानबाजी के पीछे क्या वजह है यह तो जनाब ही बेहतर बता सकते हैं।
अगर बात इनके कारनामों की करें तो इनके ऊपर मुकदमों की लंबी फेहरिस्त है.. हां यह अलग बात है कि मामले न्यायालय में विचाराधीन है … उदाहरण के तौर पर सोनी वाला मामला ही देख लीजिए… घटना भले ही 4 वर्ष पुरानी हैं.. लेकिन दिन और महीना आज वाला ही था… घटना कुछ यूं हैं कि जनाब अपने 25-30 सरहंग साथियों के साथ देर रात राजकमल होटल के सामने श्रीनाथ सोनी के घर का दरवाजा तोड़कर अंदर घुस जाते हैं.. घर मे मिलते हैं बुजुर्ग श्रीनाथ सोनी और उनकी पत्नी..अब ये 25-30 संस्कारित लड़के ऐसी ऐसी गालियां देते हैं जिनका शायद मैं लिखकर जिक्र न कर पाऊ लेकिन आप सब लोग भली भांति समझ सकते हैं.. हां अब आगे सुनिए …. ये सरहंग लड़के दोनों बुजुर्गों के साथ मारपीट करते है और घर का सारा सामान रोड पर फेंक देते हैं ।
बेचारे बुजुर्ग हाथ जोड़कर घण्टो मिन्नते करते हैं लेकिन दो दर्जन से ज्यादा लोगो में किसी का भी दिल नहीं पसीजा। सोचिए एक से डेढ़ घण्टे तक ये लोग बेखौफ होकर सड़क पर तांडव करते रहे लेकिन पुलिस नहीं पहुंची.. काफी देर बाद..कुछ नेता..और समाजसेवी एसपी से संपर्क कर पूरे घटना की जानकारी देते है तब जाकर पुलिस आती है और ये सभी सरहंग अपने-अपने रास्ते निकल लेते है.. बुजुर्ग लहूलुहान थाने पहुंचकर शिकायत करता हैं । जिस पर पुलिस लवलेश,कुशकेश ,ऋषभ व प्रिंस गुप्ता समेत 20 से 25 लोगों के खिलाफ 452, 294,323,506,34 सहित अन्य धाराओं में मुकदमा पंजीबद्ध करती है।
यदि मेरे बात पर यकीन ना हो तो प्रकरण क्रमांक 1419/22 से आप पता कर सकते हैं … इतना ही नहीं ब्रो पर शराब की पैकारी करवाने जैसे गंभीर आरोप लगे, सत्या होटल, बरगवां वाला मामला तो छोड़ ही दीजिये।
लेकिन ब्रो को कोई फर्क नहीं पड़ता.. जितने आरोप लगे नेताओं से उतनी ही नजदीकियां बढ़ती चली गई…प्रदेश उपाध्यक्ष से लेकर….युवा मोर्चा अध्यक्ष श्याम टेलर तक हर किसी से अच्छी वाली इनकी पहचान हैं। जिले के नेताओं की तो बात ही अगल है।

नेता भी ये जानते हैं कि ब्रो.. भाजपा की रीतियों – नीतियों पर बिल्कुल फिट नहीं बैठते हैं.. फिर भी भाजपा जिलाध्यक्ष सुंदर लाल शाह आंखों का तारा बनाये हुए हैं… सुंदर का प्रिंस प्रेम…किसी को भी समझ नहीं आ रहा हैं।
सुंदर का यदि यही प्रेम राम शिरोमणि शाहवाल को लेकर दिखता तो शायद हैरानी नहीं होती और हजम भी हो जाता… ऐसा इसलिए क्योंकि राम शिरोमणि ने सुंदर के साथ उस समय खड़े रहे जब सभी साथ छोड़कर किनारे हो चुके थे..और जो दिखावे के लिए साथ थे भी… तो वे अंदर ही अंदर खुश हो रहे थे … हालांकि किनारे होने वालों की भी हम बहुत गलती नहीं मानते…क्योकि आरोप ही ऐसे थे.. खैर यह कहानी बहुत लंबी और पुरानी है ।
आप सब लोगों की दिलचस्पी होगी तो किसी दिन यह कहानी भी आपको बताऊंगा… सुंदर शाह राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं और भाजपा की रीति नीति से अच्छी तरफ वाकिफ है फिर भी इस तरह के व्यक्ति के लिए प्रयास करना मेरे हिसाब से तो ठीक नहीं है… इसमें न सिर्फ उनकी छवि धूमिल हो रही है बल्कि सवाल भी उठ रहे हैं कि आखिर प्रिंस के लिए सुंदर इतना प्रेम क्यों दिखा रहे हैं..? आप लोगों ने रामायण की कथा में सुना होगा… त्रेता युग में जब प्रभु श्रीराम के बारे में प्रजा के बीच तरह-तरह की चर्चाएँ और आरोप लगाए जा रहे थे, तब माता सीता जैसी पवित्र देवी को भी लोकापवाद का सामना करना पड़ा था। उसके आगे की कथा आप लोग जानते ही होंगे।
लेकिन अध्यक्ष सुंदर शाह को यह समझना होगा कि यह कलयुग है। यहाँ न धरती फटेगी और न ही कोई चमत्कार होगा, लेकिन यदि अग्निपरीक्षा में खरे नहीं उतर पाए तो कुर्सी और पद, दोनों हाथ से जाना तय है। इसलिए बेहतर होगा कि ऐसे लोगो से दूर रहे और लोगों के मन मे उठ रहे सवाल का जवाब दे।

मैं खरी खरी में सबको मुफ्त की सलाह देता हूं..इसलिए सुंदर शाह को भी देना जरूरी समझता हूं.. और इस समय तो अध्यक्ष जी को और भी सलाह की आवश्यकता है क्योंकि इनके सभी सलाहकार पाला बदल लिए…ऐसे में मेरी ओर से यही सलाह है कि लोभ… मोह..क्रोध से ऊपर उठकर सोचना चाहिए क्योंकि आपकी टीम में ऐसा कोई बोल्ड चेहरा नहीं है…ऊपर से युवा मोर्चा की कमान ऐसे लोगों के हाथों में होगी तो आप बखूबी समझ सकते हैं क्या होगा। खैर मैं सलाह देने वाला कौन होता हूं…लेकिन फिर भी समय निकालकर एक बार विचार जरूर कीजियेगा…।

नीरज द्विवेदी “राज
अनोखी आवाज़ @खरी-खरी







