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khari-khari: साहब को सता रहा कुर्सी जाने का डर..? दूसरे थाने का कर रहे जुगाड़

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विदाई से पहले साहब, क्षेत्र के लिए कुछ तो करते जाइए…!

अनोखी आवाज़ @ खरी-खरी
नीरज द्विवेदी “राज”

आज मैं खरी-खरी कहता हूँ, बुरा नहीं लगना चाहिए, क्योंकि जो देखता और सुनता हूँ, वही कहता हूँ। यदि फिर भी बुरा लगता है, तो मैं क्या करूँ?

मंगल पांडे… हाँ, वही मंगल पांडे, जिन्होंने 1857 की क्रांति का पहला बिगुल फूंककर अंग्रेजी हुकूमत की नींद उड़ा दी थी। लेकिन आज वे स्वर्ग में बैठकर अपनी एक सप्ताह से खंडित पड़ी प्रतिमा को देखते होंगे तो निःशब्द होकर केवल आँसू बहाते होंगे और शायद यही सोचते होंगे कि क्या यह वही हिन्दुस्तान है, जिसके लिए हमने हँसते-हँसते अपने प्राणों की आहुति दी थी?

घटना सिंगरौली के बरगवां थाना क्षेत्र की है,जहाँ मंगल पांडेय जी की मूर्ति का अनावरण होना था,उससे पहले ही मूर्ति किसे ने खंडित कर दी। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि जिम्मेदार टीआई मूर्ति खंडित होने के कारणों का पता लगाने के बजाय छुट्टी पर निकल गए। इससे समझ में आता हैं कि वो मामले को लेकर कितने गंभीर हैं। इन्ही सब कारणों से क्षेत्र में चर्चा है कि बरगवां थाना की कुर्सी पर समीर वारसी के बैठने के बाद क्षेत्र की कानून-व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ चुकी है। एक ओर क्षेत्र में दिनों-दिन बढ़ता नशे का प्रकोप है, तो दूसरी ओर असामाजिक तत्वों का आतंक। लेकिन साहब हैं कि कारखास अरविंद यादव के सहारे सब कुछ छोड़ बैठे हैं और बरगवां से विदाई की चल रही अटकलों के बीच अब दूसरे थाने में जाने के जुगाड़ में जुट गए हैं।

अनावरण से पहले किसने की प्रतिमा खंडित?

बरगवां थाना क्षेत्र के बागाडीह में प्राथमिक विद्यालय के पास माँ भारती के वीर सपूत मंगल पांडे की प्रतिमा दो माह पूर्व स्थापित की गई थी। 26 मई को विधि-विधान से उसका अनावरण होना था, लेकिन उससे पहले ही 24 मई को प्रतिमा खंडित अवस्था में मिली।

घटना की सूचना मिलने पर आकाश पांडे अपने साथियों के साथ बरगवां थाने पहुँचे और लिखित में शिकायत दर्ज कराई। सभी लोगों ने अपना आक्रोश इसलिए दबाए रखा कि प्रतिमा खंडित होने के वास्तविक कारणों का पता चलेगा। लेकिन पुलिस के ढुलमुल रवैये के कारण एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी आज तक यह पता नहीं चल सका कि प्रतिमा कैसे टूटी? टूटी भी या किसी असामाजिक तत्व ने तोड़ दी?

हालाँकि पुलिस ने औपचारिकता निभाते हुए अज्ञात लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया और अपना कर्तव्य पूरा समझ लिया। टीआई ने कारखास को निगरानी रखने की हिदायत दी और स्वयं छुट्टी पर निकल गए। क्षेत्र में चर्चा है कि छुट्टी से लौटने के बाद उन्हें यह एहसास हो गया है कि अब वे यहाँ अधिक दिनों के मेहमान नहीं हैं, इसलिए किसी अन्य थाने में पदस्थापना के लिए प्रयास कर रहे हैं।
इसी सब के बीच लोगों में यह भी चर्चा है कि जब उनसे बरगवां थाना नहीं संभल रहा, तो अन्य थाना क्षेत्रों की जटिल समस्याएँ कैसे संभलेंगी? कुल मिलाकर उनकी क्षमता पर अब सवाल उठने लगे हैं। जिले के तेज-तर्रार नवागत पुलिस कप्तान को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि शायद अब उन्हें किसी अन्य थाने की कमान भी न मिले। लेकिन जाने से पहले उन्हें ऐसे असामाजिक तत्वों का चेहरा बेनकाब अवश्य करना चाहिए,और कठोर कार्यवाही करनी चाहिए।

प्रतिमा टूटने से इतिहास नहीं मिटता

आजादी की क्रांति के योद्धा मंगल पांडे का नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है और देश के करोड़ों युवाओं के विचारों में आज भी जीवंत है। ऐसे स्वतंत्रता सेनानी की प्रतिमा का खंडित होना क्षेत्र की कानून-व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

क्षेत्र में जिस प्रकार की चर्चाएँ हो रही हैं, उससे प्रतीत होता है कि किसी असामाजिक तत्व ने यह हरकत की है, जिसका खुलासा पुलिस जांच में हो सकता है। लेकिन मंगल पांडे के प्रति ऐसी दूषित मानसिकता रखने वालों को यह समझना चाहिए कि प्रतिमा टूटने से इतिहास नहीं मिटता।

पुलिस के रवैये को देखते हुए अब आकाश पांडे, ऋषभ सिंह, आदर्श, सालिक मिश्रा सहित गाँव के सैकड़ों लोग मिलकर अन्य स्थान पर नई प्रतिमा स्थापित कर रहे हैं और भव्य कार्यक्रम की तैयारियों में जुट गए हैं।

लेकिन धन्य हैं वह पुलिस जो इतनी बड़ी घटना के बाद भी कुम्भकर्णी नींद में है। पुलिस की कार्यप्रणाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्र के पूर्व विधायक सुभाष वर्मा द्वारा मौके पर पहुँचकर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए लेकिन न जाने पुलिस ने मामले को गंभीरता से क्यों नहीं लिया।

हालाँकि ऐसा भी हो सकता है कि टीआई साहब वर्तमान विधायक के निर्देश का इंतजार कर रहे हों, क्योंकि सवाल आखिरकार श्रेय का है। लेकिन एक बात तो टीआई साहब को समझ आनी चाहिए कि यदि इस कृत्य में शामिल लोग उनके रहते चिन्हित नहीं होते,और कार्यवाही नहीं होती तो साहब के वर्दी पर ऐसा दाग लगेगा जो शायद कभी न मिटे। ऐसे में मामले को गंभीरता से लेना चाहिए न कि पूरी निर्भरता जांचकर्ता अनूप मिश्रा पर होनी चाहिए। अब देखना होगा क्या कार्यवाही होती हैं?

अनोखी आवाज़@खरी-खरी
नीरज द्विवेदी “राज

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Author: anokhiaawaj