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यदि आपका भी बच्चा हकलाता हैं तो करे ये उपाय,बढ़ेगा कॉन्फिडेंस होगा तत्काल सुधार

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चाइल्डहुड ग्रोथ के दौरान कई बच्चो में हकलाने की समस्या सामने आती है. ऐसे में लोगो के कई बार हसी उड़ाए जाने से बच्चो में कॉन्फिडेंस लो होने की संभावना बढ़ जाती है,इसलिए बच्चो की पर्सनालिटी डेवलपमेंट में काफी मुश्किलें आती है, बालपन में बनाया मजाक जीवन भर के लिए उनकी मति भ्रमित कर देता है.
लोगो का मनना है की हकलाना एक बीमारी है, मगर यह कोई सीरियस बीमारी नहीं बल्कि महज़ एक डिसऑर्डर है, जिसे आसानी से ठीक किया जा सकता है.

हकलाने की समस्या कैसे आती है

बच्चों के इस हकलाने के पीछे कई कारण हो सकते हैं. जैसे उसको अपनी बात पूरी तरह रखने का मौका नहीं देना, जब भी वह अक्सर अपनी बात रखने की कोशिश करे तो उसे टोक या डांट कर रोक देना. या फिर कोई जेनेटिक कारण, या फिर कोई न्यूरोलॉडिकल वजह. अच्छी बात यह है कि हकलाने की परेशानी को स्पीच थेरेपी की मदद से आसानी से दूर किया जा सकता है. ध्यान देने वाली बात यह भीं है की बच्चों के तोतलेपन और हकलाने दोनों में काफी अंतर है। ऐसे में बिना कारण जाने बेवजह न खुद परेशान हो न बच्चे को परेशान करें। और यदि इस तरह की समस्या बनी हुई है तो आप कुछ आसान उपायों से इसे ठीक क्र सकते हैं।

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बोले का निरंतर अभ्यास

कभी कभी देखा गया है की बच्चा जल्दी बोलने के चक्कर में साफ और स्पष्ट नहीं बोल पाता। ऐसे में आप उसे यह समझाए की क्या पहले जो बोलना है उसको मन में सोच ले फिर धीरे धीरे बोलने का प्रयास करें इस दौरान इस बात का ध्यान रखे की शब्दों का उत्चारण हो।

शीशे के सामने अभ्यास

शीशे के समन प्रयास करके खुद में आत्मविश्वास पैदा किया जा सकता है. अगर बच्चे में कॉन्फिडेंस की कमी है, जिसके कारण वह अपनी बात लोगों के सामने नहीं पाता है. ऐसे में उसके लिए मिरर प्रैक्टिस एक काफी अच्छी एक्सरसाइज है. इसमें केवल बच्चे को मिरर के सामने खड़े होकर कुछ बाते करने को कहें. इससे बच्चा अपनी बॉडी लैंग्वेज को देख सकेगा। इससे वह बोलने की तौर तरिके में सुधाकर कर सकता है।

तेज पढ़ना

यह काफी आसान लेकिन प्रभावशाली मेथड है. इसमें बच्चे के जोर-जोर से कोई भी अख़बार पढ़ने को कहें. साथ ही इस दौरान उसे बिल्कुल न टोकें. इससे उसमें अपनी बात को कॉन्फिडेंस के साथ लोगों के सामने रखने की क्षमता पैदा होगी. साथ ही हकलाहत भी दूर होगी.

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अगर समस्या ज्यादा गंभीर लगे तो डॉक्टरी सलाह लेने में किसी भी प्रकार की देरी न करें. क्योंकि प्रोफेशन द्वारा कराई गई स्पीच थेरेपी बच्चे के अनुसार ही होगी. साथ ही अगर कोई और कारण होगा तो उसको भी जल्द दूर किया जा सकेगा.

 

uttam Dubey
Author: uttam Dubey

पत्रकारिता में 3 वर्ष से ज्यादा का अनुभव। खोजी खबरों में विशेष रूचि। सिखने का जूनून रखते हैं।